योगेंद्र मलिक
देहरादून, 14 अप्रैल 2026:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अपने खास अंदाज में उत्तराखंड के लोगों से गहरा जुड़ाव बनाते नजर आए। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के अवसर पर उनका व्यक्तित्व, वेशभूषा और भाषण शैली पूरी तरह पहाड़ी रंग में रंगी दिखी। सिर पर पारंपरिक ब्रह्मकमल टोपी, भाषण में गढ़वाली-कुमाऊंनी के शब्द और स्थानीय आस्था के जिक्र ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
अपने संबोधन की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री ने ‘भुला-भुलियों’, ‘सयाणा’, ‘आमा’ और ‘बाबा’ जैसे पहाड़ी शब्दों का प्रयोग कर उपस्थित जनसमूह का दिल जीत लिया। उनका यह अंदाज न सिर्फ स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान दर्शाता है बल्कि लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेसवे के निर्माण को मां डाट काली के आशीर्वाद से जोड़ते हुए कहा कि देहरादून पर उनकी विशेष कृपा बनी हुई है। उन्होंने उत्तराखंड और आसपास के धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए हरिद्वार कुंभ, नंदा राजजात, पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग जैसे पवित्र स्थलों का प्रभावशाली जिक्र किया। साथ ही उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में स्थित संतला माता मंदिर का स्मरण कर क्षेत्रीय आस्था को भी सम्मान दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच मजबूत तालमेल भी देखने को मिला। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने धामी को ‘लोकप्रिय’, ‘कर्मठ’ और ‘युवा’ नेता बताते हुए उनकी सराहना की। दोनों नेताओं की यह केमिस्ट्री मंच पर साफ नजर आई।
वहीं, जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उस दौरान भी मोदी और धामी के बीच किसी विषय पर बातचीत होती दिखी।
प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री की बातों को ध्यानपूर्वक सुनते नजर आए, जो उनके बीच बेहतर संवाद और समन्वय का संकेत देता है। यह कार्यक्रम केवल एक एक्सप्रेसवे उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रधानमंत्री के लोकल कनेक्ट और उत्तराखंड के प्रति उनके भावनात्मक जुड़ाव का जीवंत उदाहरण बन गया।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की प्रमुख खासियतें
शामिल राज्य-दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड
कुल लंबाई-213 किमी
परियोजना लागत- ₹11,963 करोड़
पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण
-12 किमी लंबा एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर
-200 मीटर लंबे 2 एलिफेंट अंडरपास
-6 एनिमल पास (वन्यजीव मार्ग)
-20 किमी वन क्षेत्र परियोजना में शामिल
-आधुनिक तकनीक से 33,840 पेड़ों का कटान बचाया गया
-1.95 लाख पेड़ों का प्रतिपूरक वृक्षारोपण

इन्फ्रास्ट्रक्चर व कनेक्टिविटी
-6 लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे
-2 आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज)
-10 बड़े पुल
-7 इंटरचेंज
-डाट काली के पास 370 मीटर लंबी सुरंग
समय और ईंधन की बचत
-दिल्ली-देहरादून यात्रा मात्र 2.5 घंटे में
-करीब 19% ईंधन की बचत का अनुमान






