
लखनऊ, 6 अगस्त 2026:
यूपी में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक एवं पूर्वांचल के प्रभावशाली नेता उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह करीब दो वर्ष से बीमार थे। उनके निधन से बसपा को बड़ा राजनीतिक और भावनात्मक झटका लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए उमाशंकर सिंह पूर्वांचल की राजनीति का मजबूत चेहरा माने जाते थे। वर्ष 2012 में पहली बार बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे और इसके बाद 2017 तथा 2022 में भी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा पूरे प्रदेश में केवल एक सीट जीत सकी थी। यह सीट रसड़ा थी, जहां से उमाशंकर सिंह ही पार्टी के एकमात्र विधायक बने। इसके बाद उन्हें बसपा विधायक दल का नेता भी बनाया गया।

2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खनवर गांव में जन्मे उमाशंकर सिंह के पिता घुराहु सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी थे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से और उच्च शिक्षा बलिया के एक कॉलेज से प्राप्त की। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले उमाशंकर सिंह वर्ष 2000 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए और बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष भी बने। राजनीति के साथ-साथ वे ठेकेदारी व्यवसाय और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। क्षेत्र में जनसंपर्क, विकास कार्यों और लोगों की समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी अलग पहचान थी।
बसपा प्रमुख मायावती का उनके साथ विशेष आत्मीय रिश्ता था। वह उन्हें अपना भाई मानती थीं और रक्षाबंधन पर राखी भी बांधती थीं। मायावती ने सोशल मीडिया पर शोक संदेश जारी करते हुए उन्हें कर्मठ, ईमानदार और पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित नेता बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने शोक संदेश में कहा कि रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। वहीं, अखिलेश यादव ने भी उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उमाशंकर सिंह के निधन से पूर्वांचल की राजनीति ने एक ऐसे जनाधार वाले नेता को खो दिया जिन्होंने विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में भी अपनी मजबूत पहचान और जनविश्वास कायम रखा।







