Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ : आजादी के 75 साल बाद पहली बार इस गांव में लोगों ने डाले वोट

सुकमा, 24 फरवरी 2025

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित केरलापेंडा गांव में उस समय ऐतिहासिक क्षण आया जब वहां के निवासियों ने आजादी के बाद पहली बार मतदान किया।

रविवार को मतदान के तीसरे चरण के दौरान हुई यह उपलब्धि गांव वालों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था, जो इससे पहले कभी चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं रहे थे। केरलपेंडा के एक निवासी ने बताया, “मैंने पहली बार मतदान किया है। हमने पहले कभी मतदान नहीं किया था।”

एक अन्य निवासी ने कहा कि चुनाव में पहली बार ग्रामीणों को राजनीतिक नेताओं के सामने अपनी मांगें उठाने का मौका मिला।

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उन्होंने एएनआई से कहा, “यहां 75 साल बाद मतदान हो रहा है। आस-पास के गांवों के लोग भी वोट डालने पहुंच रहे हैं… मुझे खुशी है कि हम विकास की ओर बढ़ेंगे। यह पहली बार है जब हमें नेताओं के सामने अपनी मांगें उठाने का मौका मिला…”

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यह घटनाक्रम पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में भी इसी तरह के सकारात्मक रुझानों के बाद सामने आया है, जहां बीजापुर जिले के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया था।

जिले के राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों के निवासियों ने लोकतंत्र के उत्सव में अपनी उत्साहपूर्ण भागीदारी दर्ज कराई। इस क्षेत्र को उग्रवादियों के लिए सबसे सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है और जहां सुरक्षा बलों ने हाल ही में प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के 31 कार्यकर्ताओं को मार गिराया था।

सर्वाधिक उग्रवाद प्रभावित बीजापुर जिले के सेंदरा गांव सहित राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच गांवों के सैकड़ों संभावित मतदाताओं ने बुलेट के बजाय बैलेट पर अपना विश्वास जताया है और गुरुवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

करीब 70 किलोमीटर की दूरी तय कर ग्रामीणों ने लाल आतंक को नजरअंदाज कर लोकतंत्र में अपनी आस्था प्रदर्शित की।

घने जंगलों, नदियों और नालों सहित कठिन रास्तों को पार करके मतदाता (बुजुर्गों सहित) अपने मताधिकार का प्रयोग करने भोपालपटनम पहुंचे। लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेकर ग्रामीणों ने न केवल लोकतंत्र में आस्था जताई बल्कि मुख्यधारा के विकास का हिस्सा बनने की इच्छा भी जताई।

अशांत गांव के निवासी कावरे शंकर ने वोट डालने के बाद कहा, “हम सरकार से रोजगार के अवसर, सड़क संपर्क, बिजली, पेंशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं चाहते हैं।”

मतदान अधिकारी यालम शंकर ने कहा, “अपने स्वयं के संसाधनों का उपयोग करके लोग लगभग 70 किलोमीटर की दूरी तय करके यहां पहुंचे और चुनाव में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। पिछली बार की तुलना में मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है क्योंकि लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का महत्व समझ में आ गया है।”

ये वोट ग्रामीणों के लोकतंत्र में विश्वास को दर्शाते हैं तथा प्रगति और शांति के पक्ष में हिंसा और उग्रवाद को अस्वीकार करने के उनके संकल्प को दर्शाते हैं।

हाल ही में हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में प्रतिबंधित माओवादी संगठन के 31 सदस्यों को मार गिराया, जिससे क्षेत्र में विद्रोहियों का प्रभाव और कम हो गया।

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