Uttarakhand

धामी ने दिया चारधाम यात्रा का नया मंत्र… सुरक्षा, संवाद संग आसान दर्शन पर फोकस

सीएम ने की हाईलेवल समीक्षा बैठक, मानसून को देखते हुए रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही रोकने के निर्देश, धामों में भीड़ बढ़ने पर होल्डिंग एरिया में यात्रियों के लिए भोजन, पेयजल, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हों

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 2 जून 2026:

चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में प्रवेश के साथ उत्तराखंड सरकार ने सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यात्रियों को समय पर जानकारी देने पर खास जोर दिया है। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों से कहा कि यात्रा प्रबंधन का मूलमंत्र सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और लगातार संवाद होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से दर्शन व्यवस्था के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों की आवाजाही पर रोक का सख्ती से पालन कराया जाए। ट्रक और अन्य भारी वाहनों को केवल रात के समय ही चलने की अनुमति दी जाए, जबकि दिन में उनका संचालन प्रतिबंधित रहे।

उन्होंने कहा कि किसी धाम या पड़ाव पर तय क्षमता से ज्यादा भीड़ होने पर नीचे बने होल्डिंग एरिया और प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर यात्रियों व वाहनों को नियंत्रित किया जाए। भीड़ प्रबंधन चरणबद्ध तरीके से किया जाए ताकि धामों में अव्यवस्था की स्थिति न बने। जहां श्रद्धालुओं को रोका जाए, वहां भोजन, पेयजल, शौचालय, पार्किंग समेत सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध रहें।

बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यात्रियों को सिर्फ रोकना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी बताया जाए कि रोक क्यों लगाई गई है, कितनी देर इंतजार करना पड़ सकता है और आगे की व्यवस्था क्या है। पुलिस, प्रशासन और यात्रा प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों को श्रद्धालुओं के प्रति सहयोगी और संवेदनशील व्यवहार अपनाने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने कहा कि मौसम, यातायात, मार्ग अवरोध या दर्शन में देरी जैसी जानकारी यात्रियों तक लगातार पहुंचती रहनी चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल और एफएम रेडियो का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा का पहला चरण प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभागों के समन्वय से सफल रहा है, लेकिन अब मानसून के कारण चुनौतियां बढ़ेंगी। ऐसे में सभी विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम करें और श्रद्धालुओं से मिल रहे सुझावों व शिकायतों की रोज समीक्षा कर जरूरी सुधार किए जाएं।

संवेदनशील इलाकों में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस और राहत-बचाव उपकरण पहले से तैनात रखने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि वे फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद उपलब्ध कराएं।

मुख्यमंत्री ने गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल को यात्रा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। चारधाम यात्रा से जुड़े जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को भी लगातार निगरानी रखने को कहा गया। यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट प्रदर्शित करने, खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग कर गुणवत्ता जांचने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में चारों धामों और पैदल मार्गों पर स्वच्छता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। पैदल मार्गों पर पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया। गंभीर मरीजों को जल्द इलाज उपलब्ध कराने के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा के लिए राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए। केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त शेड लगाने और बारिश व तेज धूप से बचाव के इंतजाम मजबूत करने को भी कहा गया।

बैठक में सतपाल महाराज, भरत चौधरी, विधायक अनिल नौटियाल, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिला, उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। वर्चुअल माध्यम से भी विधायक व अफसर जुड़े रहे।

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