लखनऊ, 8 मई 2026:
उत्तर प्रदेश में कौशल विकास अब सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रह गया है। सरकार ने स्किल डेवलपमेंट को रोजगार, इंडस्ट्री और स्वरोजगार से जोड़कर युवाओं के लिए नया रास्ता तैयार किया है। बीते नौ वर्षों में प्रदेश के करीब 14 लाख युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया गया है।
सरकार की ओर से आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थ सर्विस, ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन, फैशन डिजाइनिंग, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी समेत कई सेक्टर में युवाओं को ट्रेनिंग दी गई। प्रशिक्षण लेने वाले 7.50 लाख से ज्यादा युवाओं को नौकरी या स्वरोजगार से जोड़ा गया, जिससे बड़ी तादाद में युवाओं की आमदनी बढ़ी है।
इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से युवाओं को तैयार करने के लिए सरकार ने प्रोजेक्ट प्रवीण पर भी जोर दिया। इस योजना के तहत अब तक 1.35 लाख विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और रोजगार आधारित स्किल की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। योजना का मकसद पढ़ाई के साथ युवाओं को प्रैक्टिकल नॉलेज देना है, ताकि डिग्री पूरी होते ही उनके पास रोजगार के मौके मौजूद रहें।
प्रदेश में बड़े स्तर पर रोजगार मेलों का आयोजन भी किया गया। पिछले नौ वर्षों में 188 वृहद रोजगार मेले लगाए गए, जिनके जरिए करीब 4.40 लाख युवाओं को रोजगार मिला। इन मेलों में निजी कंपनियों, औद्योगिक संस्थानों और अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों ने हिस्सा लिया। इससे युवाओं को अपने ही जिले और प्रदेश में नौकरी के मौके मिले हैं।
सरकार अब युवाओं को सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें उद्यमिता की तरफ भी बढ़ा रही है। अलग-अलग योजनाओं के जरिए ट्रेनिंग, फाइनेंशियल मदद, मार्केट लिंकिंग और गाइडेंस उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका असर यह है कि प्रदेश में स्टार्टअप, एमएसएमई और लोकल इंडस्ट्री से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले उत्तर प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट को आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार माना जा रहा है।






