Uttarakhand

2.75 करोड़ के डिजिटल लेन-देन का खुला राज, बिहार से उत्तराखंड तक फैला नेटवर्क, पांच साइबर ठग दबोचे

हरिद्वार पुलिस ने चेकिंग के दौरान कार में सवार आरोपियों को पकड़ा, तलाशी में बैग से एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और नकदी मिली, नेटवर्क के अन्य सदस्यों व मुख्य सरगना की तलाश

राजकिशोर तिवारी

हरिद्वार, 26 अगस्त 2026ः

उत्तराखंड की हरिद्वार पुलिस ने साइबर अपराध हॉटस्पॉट अभियान के तहत बिहार से हरिद्वार तक फैले साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 35 एटीएम, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 37,500 रुपये नकद बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं। पुलिस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मुख्य सरगना की तलाश में जुटी है।

पुलिस रात में कर रही थी गाड़ियों की चेकिंग

ये भी पढ़ें:

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि पुलिस मंगलवार की रात श्यामपुर क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सज्जनपुर पीली क्षेत्र में मुखबिर से सूचना मिली कि सफेद रंग की कार में साइबर ठगी से जुड़े कुछ लोग सवार हैं। सूचना पर पुलिस ने रसियाबड़ सिंगल लाइन प्वाइंट पर चेकिंग शुरू की। कुछ ही देर में चिड़ियापुर की ओर से आई कार को रोककर तलाशी ली गई। कार में सवार पांच लोगों की तलाशी के दौरान एक बैग से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और नकदी मिली।

एसबीआई सहित कई बैंकों की मिलीं 14 पासबुक

पुलिस को इस बरामदगी से एक संगठित साइबर गिरोह की आशंका हुई। बरामद 14 बैंक पासबुकों में भारतीय स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक और नैनीताल बैंक समेत कई बैंकों के खाते मिले। खातों का संबंध हरिद्वार, ऋषिकेश, कनखल, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से सामने आया है। विभिन्न बैंकों के 35 एटीएम कार्ड भी पाए गए।

वाट्सऐप बातचीत से मिलीं अहम जानकारियां

बरामद मोबाइल फोन की प्रारंभिक जांच में वाट्सऐप बातचीत, बैंक खाता नंबर, खाताधारकों के नाम, क्यूआर कोड और लेन-देन से संबंधित जानकारी मिली है। मोबाइल की गैलरी में विभिन्न बैंक पासबुक और खातों से जुड़े दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिलीं। पुलिस के प्रारंभिक विश्लेषण में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम हासिल करते थे। ठगी की रकम पहले इन खातों में पहुंचाई जाती थी। इसके बाद यूपीआई के माध्यम से रकम दूसरे खातों में भेजी जाती और एटीएम अथवा नकद निकासी मशीन से रकम निकाल ली जाती थी। निकाली गई रकम को गिरोह के सदस्यों के बीच कमीशन के रूप में बांटा जाता था।

आरोपियों में कई नालंदा व नवादा के निवासी

गिरफ्तार आरोपियों में कृष्णा पांडे, निरंजन कुमार, सन्नी, चन्द्रमणि कुमार और चन्दन पांडे शामिल हैं। इनमें कई बिहार के नालंदा और नवादा के निवासी हैं। पूछताछ में बिहार से जुड़े अन्य लोगों द्वारा बैंक खाते उपलब्ध कराने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मुख्य संचालकों की पहचान में जुटी है। बरामद मोबाइल और लैपटॉप की डिजिटल जांच और बैंक खातों के लेन-देन के विवरण का परीक्षण कराया जा रहा है। एसएसपी हरिद्वार ने कहा कि साइबर अपराधी कहीं भी छिपे हों पुलिस उनके नेटवर्क तक पहुंचकर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाएगी।

ये भी पढ़ें  बिहार के बेगूसराय में चलती ट्रेन के इंजन से निकला धुआं और आग, जान बचाने ट्रैक पर कूंदे यात्री

Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button