
लखनऊ, 23 अगस्त 2026:
यूपी की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने रविवार को लखनऊ में ऐसा दावा किया जिसने सरकारी स्कूलों के रिकॉर्ड और जमीन पर उनकी वास्तविक स्थिति के बीच के अंतर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संजय सिंह ने जौनपुर जिले के पांच ऐसे प्राथमिक विद्यालयों का मामला सामने लाने का दावा किया जो सरकारी रिकॉर्ड में तो ‘ऑपरेशनल’ हैं लेकिन जमीन पर उनका कोई अता-पता नहीं है।
संजय सिंह ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन स्कूलों को ‘गायब स्कूल’ और ‘भूतिया स्कूल’ बताते हुए खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इन पांच में से किसी एक स्कूल को भी जमीन पर खोजकर दिखा देता है तो वह अपनी तनख्वाह से उसे एक लाख रुपये का नकद इनाम देंगे।
उत्तर प्रदेश में हर जगह सरकारी स्कूल बर्बाद हो रहे हैं, जिसके खिलाफ आम आदमी पार्टी मजबूती से अभियान चला रही है, बौद्ध प्रांत के स्कूलों की हालत देखिए।
सुल्तानपुर से लेकर सिद्धार्थनगर और प्रतापगढ़ तक सरकारी स्कूल बदहाल हैं, कहीं छत नहीं तो कहीं सफाई नहीं, कहीं बिल्डिंग जर्जर तो… pic.twitter.com/37v3oKrTqF
— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) August 23, 2026
कागजों में स्कूल, जमीन पर खाली मैदान?
संजय सिंह के मुताबिक जिन विद्यालयों का नाम सामने आया है, उनमें प्राथमिक विद्यालय ढालगर टोला, प्राथमिक विद्यालय मिसिरपुर कन्या, कंपोजिट विद्यालय गदन अर्जनी, प्राथमिक विद्यालय उर्दू बाजार और प्राथमिक विद्यालय बाग हासिम शामिल हैं। आप सांसद ने नगर शिक्षा अधिकारी की एक चिट्ठी का हवाला देते हुए दावा किया कि इन विद्यालयों की बिल्डिंग का मौके पर पता नहीं है और उनकी जमीन पर जमीन स्वामियों का कब्जा है।
उनका आरोप है कि U-DISE पोर्टल पर इन स्कूलों को अभी भी संचालित दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति में न शिक्षक हैं, न बच्चे और न ही विद्यालय की इमारत। अगर यह दावा जांच में सही साबित होता है तो मामला सिर्फ पांच स्कूलों के अस्तित्व का नहीं अपितु सरकारी शिक्षा व्यवस्था में डेटा की विश्वसनीयता और स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘स्कूल चोरी’ पर सरकार को घेरा
संजय सिंह ने इसे उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का ‘अनोखा मॉडल’ बताते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में चंदा चोरी, जमीन चोरी और चीनी चोरी के बाद अब ‘स्कूल चोरी’ का मॉडल सामने आ गया है। उन्होंने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की बदहाली छिपाने का भी आरोप लगाया। संजय सिंह ने कहा कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जबकि उनके आरोपों के मुताबिक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
उन्होंने नोएडा में स्कूल की बदहाली का वीडियो सामने लाने पर ‘आप’ यूथ विंग के प्रदेश अध्यक्ष पंकज सिंह और हरदोई में कार्यकर्ता फिरोज सिद्दीकी के खिलाफ FIR का मुद्दा भी उठाया। संजय सिंह ने चेतावनी दी कि यदि कथित भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वह धारा 156(3) के तहत अदालत का रुख करेंगे।
तीन क्षेत्रों के स्कूलों की बदहाली भी दिखाई
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत संजय सिंह ने अवध, रुहेलखंड और ब्रज प्रांत के सरकारी स्कूलों की वीडियो रिपोर्ट भी जारी की। उनके मुताबिक प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र के कुछ स्कूलों में छतों की स्थिति खराब है, शौचालय गंदे हैं और कहीं-कहीं पांच कक्षाओं के लिए महज तीन शिक्षक हैं। रुहेलखंड क्षेत्र के बरेली, बदायूं और बिजनौर के स्कूलों में बच्चों के कीचड़ और गंदगी के बीच बैठने तथा खराब पेयजल व्यवस्था का दावा किया गया। वहीं आगरा, फिरोजाबाद और हाथरस के स्कूलों को लेकर उन्होंने कूड़े के ढेर, जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। एक जगह 800 बच्चों पर केवल चार शिक्षक होने का भी दावा किया गया।
बोले- जारी रहेगा ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में 90 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान जारी रहेगा और लोगों से अपने क्षेत्र के खराब सरकारी स्कूलों के वीडियो 8382928009 पर WhatsApp करने की अपील की। अब जौनपुर के पांच कथित ‘गायब स्कूलों’ का मामला यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज स्कूलों की जमीन पर मौजूदगी और वहां बच्चों की पढ़ाई की वास्तविक स्थिति की निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है।






