
लखनऊ, 22 अगस्त 2026:
यूपी की सियासत में ‘पीडीए’ को लेकर सपा और भाजपा गठबंधन के नेताओं के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर कैबिनेट मंत्री एवं सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए एक बार फिर तीखा हमला बोला। राजभर ने अखिलेश को सलाह दी कि 2027 में सत्ता हासिल करने का सपना देखने से पहले सपा को बचाने की चिंता करनी चाहिए।
राजभर ने अपने पोस्ट की शुरुआत ‘अखिलेश जी! नमस्ते’ से करते हुए दावा किया कि सपा के भीतर ही उसके ‘पीडीए’ की कथित हकीकत सामने आने लगी है। उन्होंने पीडीए के ‘पी’ को लेकर तंज कसते हुए कहा कि न पंडित और न पिछड़ा उनके साथ है, जबकि ‘डी’ भी अब उनके खिलाफ खड़ा होने लगा है। राजभर ने यहां तक कहा कि अंत में केवल ‘अशफाक वाला ए’ ही बचेगा।
सहारनपुर के विवाद को बनाया हथियार
राजभर ने सहारनपुर सर्किट हाउस में हुई कथित घटना का जिक्र करते हुए सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बैठक में दलित समाज की जिला पंचायत सदस्य ममता चौधरी ने सपा नेताओं को खरी-खोटी सुनाई और दलित तथा गैर-यादव पिछड़ा समाज के कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए।

राजभर ने सपा के पीडीए को अपने अंदाज में ‘पीट देगा अहीर, पीट देगा अल्पसंख्यक’ बताते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर कुर्सी को लेकर खींचतान चल रही है। उन्होंने सपा नेताओं पर पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट जैसे आरोप भी लगाए और अखिलेश से कहा कि वे अपने नेताओं को सार्वजनिक मंच पर व्यवहार करने का सलीका सिखाएं।
कुर्मी समाज को लेकर भी अखिलेश को घेरा
मंत्री राजभर ने शुक्रवार की अपनी पोस्ट में कुर्मी समाज से जुड़े कई मामलों का जिक्र किया। उन्होंने बाराबंकी के हंसराज वर्मा की हत्या का आरोप सपा से जुड़े लोगों पर लगाते हुए दावा किया कि जमीन कब्जाने के विवाद में उनकी हत्या की गई। हालांकि, ये आरोप राजभर की ओर से लगाए गए हैं। इनके संबंध में स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख पोस्ट में नहीं है।
उन्होंने प्रयागराज, बांदा और चंदौली से जुड़े कथित विवादों का भी जिक्र किया और सपा पर गैर-यादव पिछड़ों, खासकर कुर्मी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया। राजभर ने अखिलेश यादव को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि कुर्मी समाज अपने सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा करना जानता है।
उन्होंने पीडीए की नई व्याख्या करते हुए इसे ‘पटेल द्रोही अहिर’ तक करार दिया और दावा किया कि कुर्मी समाज कथित अपमान का राजनीतिक हिसाब लेगा। ऐसे बयानों से साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में पीडीए की राजनीति को लेकर सियासी बयानबाजी और ज्यादा धार पकड़ सकती है।






