
बाराबंकी, 22 अगस्त 2026:
यूपी के बाराबंकी जिले में सरकारी राशन की दुकान के स्टॉक में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बाद कोटेदार रंजीत बहादुर सरोज के खिलाफ जैदपुर थाने में FIR दर्ज कराई गई है। मामला नवाबगंज तहसील के हरख ब्लॉक की ग्राम पंचायत टेरा का है। जांच में दुकान पर गेहूं, चावल और चीनी का भौतिक स्टॉक नहीं मिला, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में बड़ी मात्रा में खाद्यान्न बचा हुआ दर्ज था।
पहले कम वितरण पर दी गई थी चेतावनी
पूर्ति निरीक्षक अवधेश पांडे के मुताबिक रंजीत बहादुर सरोज की दुकान से पिछले तीन महीनों से लगातार 70 प्रतिशत से कम राशन वितरण हो रहा था। इसको लेकर एसडीएम नवाबगंज कार्यालय से 29 जुलाई को चेतावनी जारी की गई थी। कोटेदार को वितरण के सभी दिनों में तय समय पर दुकान खोलने के साथ कार्डधारकों को नियमानुसार राशन देने के निर्देश दिए गए थे।
अगस्त में भी शुरू नहीं किया राशन वितरण
अगस्त 2026 का राशन वितरण चक्र 5 अगस्त से शुरू हुआ, लेकिन 10 अगस्त तक दुकान से ई-पॉश मशीन के जरिए वितरण शुरू नहीं किया गया। इसके बाद कोटेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर वितरण शुरू करने के साथ स्पष्टीकरण देने को कहा गया। 18 अगस्त तक भी वितरण शुरू नहीं होने पर पूर्ति विभाग की टीम टेरा गांव पहुंची। सुबह करीब 11:30 बजे जांच टीम को उचित दर की दुकान बंद मिली। कोटेदार से मोबाइल पर कई बार संपर्क किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।
63 कार्डधारकों के बयान दर्ज
जांच के दौरान अधिकारियों ने कार्डधारकों से अलग-अलग पूछताछ की। रिकॉर्ड में 63 कार्डधारकों के बयान दर्ज किए गए। इनमें कई लोगों ने बताया कि अगस्त में उन्हें रंजीत की दुकान से राशन नहीं मिला। मजबूरी में उन्हें दूसरी सरकारी राशन दुकानों से पोर्टेबिलिटी के जरिए खाद्यान्न लेना पड़ा। कई कार्डधारकों ने पिछले महीनों में भी राशन के लिए बार-बार दुकान के चक्कर लगवाने, कम खाद्यान्न देने और अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाए। कुछ लोगों ने 1 से 3 किलो तक राशन कम देने का आरोप लगाया। चीनी की मात्रा कम देने के साथ 60 रुपये में निर्धारित मात्रा से ज्यादा रकम लेने की शिकायत भी बयानों में सामने आई।
दोबारा जांच में भी दुकान बंद मिली
कार्डधारकों के बयान लेने के बाद 18 अगस्त को दोपहर करीब 3 बजे टीम ने दुकान का दोबारा निरीक्षण किया। उस समय भी रंजीत बहादुर सरोज दुकान पर नहीं पहुंचे थे। दुकान बंद मिली। मोबाइल पर लगातार संपर्क करने के बावजूद उनसे बात नहीं हो सकी। जांच में दुकान पर स्टॉक बोर्ड, साइन बोर्ड, विभागीय अधिकारियों के मोबाइल नंबर, राशन कार्डधारकों की सूची या सूचना पट्ट जैसी जरूरी जानकारियां भी प्रदर्शित नहीं मिलीं।
रिकॉर्ड में 147.49 कुंतल चावल का स्टॉक
विभागीय Supply Chain Module और MIS Report की जांच में 18 अगस्त तक दुकान में 147.49 कुंतल चावल, 98.21 कुंतल गेहूं और 1.11 कुंतल चीनी उपलब्ध होनी चाहिए थी। इसमें जुलाई के वितरण के बाद बचा स्टॉक भी शामिल था, साथ ही अगस्त के वितरण के लिए आवंटित खाद्यान्न भी दर्ज था। जांच टीम को दुकान के परिसर में गेहूं, चावल या चीनी का कोई स्टॉक नहीं मिला। मौके पर सिर्फ ई-पॉश मशीन से जुड़ा इलेक्ट्रॉनिक वेइंग स्केल मिला। ई-पॉश मशीन, आइरिस स्कैनर और चार्जर भी दुकान पर नहीं मिले।
दुकान के दूसरे हिस्से से जुड़ा था तीसरा गेट
जांच के दौरान दुकान के तीसरे गेट पर लगे ताले की चाबी पास की गुमटी चलाने वाले अब्दुल गफूर के पास मिली। उसके बयान के मुताबिक वह दुकान के एक हिस्से में अपना सामान रखता था। उसने बताया कि तीसरे गेट से दुकान के अंदर भी प्रवेश किया जा सकता है। ग्राम प्रधान प्रशासक मिथलेश कुमारी और अन्य ग्रामीणों की मौजूदगी में ताला खुलवाकर दुकान की जांच की गई। इस दौरान भी खाद्यान्न का कोई स्टॉक नहीं मिला।
गुमटी संचालक ने बोरी हटाने का लगाया आरोप
अब्दुल गफूर ने अपने बयान में आरोप लगाया कि रंजीत बहादुर सरोज दुकान से समय-समय पर एक-दो बोरी खाद्यान्न हटाता था। उसने यह भी कहा कि अगस्त में दुकान से राशन वितरण नहीं किया गया। दुकान के मालिक मोजकी ने भी बयान दिया कि उसने अपनी दुकान 1200 रुपये महीने के किराये पर रंजीत बहादुर सरोज को दी थी। उसके मुताबिक पिछले महीने का किराया भी कोटेदार ने नहीं दिया था।
ग्राम प्रधान ने भी शिकायतों की पुष्टि की
ग्राम पंचायत की प्रशासक प्रधान मिथलेश कुमारी ने जांच टीम को दिए बयान में कहा कि रंजीत बहादुर सरोज करीब चार महीने पहले मृतक आश्रित के तौर पर कोटेदार नियुक्त हुआ था। उनके मुताबिक कार्डधारकों को राशन के लिए बार-बार दुकान के चक्कर लगाने पड़ते थे। अगस्त में राशन वितरण नहीं किया गया। प्रधान ने कार्डधारकों से अभद्र व्यवहार करने, नशे की हालत में गाली-गलौज करने और पूरा खाद्यान्न नहीं देने के आरोप भी लगाए।
जांच में आठ तरह की अनियमितताएं मिलीं
पूर्ति विभाग की रिपोर्ट में कोटेदार के स्तर पर कई अनियमितताएं दर्ज की गई हैं। इनमें कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं देना, अगस्त का वितरण ई-पॉश मशीन से शुरू नहीं करना, दुकान पर जरूरी सूचना प्रदर्शित नहीं करना, रिकॉर्ड में दर्ज खाद्यान्न का मौके पर नहीं मिलना, चीनी की निर्धारित मात्रा से कम वितरण, तय कीमत से ज्यादा रकम लेना, राशन कम देना और कार्डधारकों को समय पर राशन नहीं देना शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक इन वजहों से कार्डधारकों को दूसरी उचित दर दुकानों से पोर्टेबिलिटी के जरिए राशन लेना पड़ा।
डीएम के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी बाराबंकी ने 20 अगस्त को रंजीत बहादुर सरोज की उचित दर दुकान का एग्रीमेंट सस्पेंड करने का आदेश दिया। साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत FIR दर्ज कराने की अनुमति दी गई। इसके बाद पूर्ति निरीक्षक हरख-नवाबगंज अवधेश कुमार पांडेय की तहरीर पर रंजीत बहादुर सरोज के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इस पूरे मामले में कार्डधारकों के बयान, खाद्यान्न आवंटन व वितरण की रिपोर्ट के 46 पेज के दस्तावेज भी सौंपे गए हैं।






