
उधमसिंहनगर, 1 सितंबर 2026:
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा में मंगलवार को राज्य आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों की याद में श्रद्धांजलि कार्यक्रम हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में पहुंचकर खटीमा गोलीकांड के शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पचक्र अर्पित किया। उन्होंने शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
सात आंदोलनकारियों को किया याद
मुख्यमंत्री ने भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानन्द भट्ट व परमजीत सिंह को याद करते हुए कहा कि खटीमा गोलीकांड में इन आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। उन्होंने कहा कि राज्य का हर नागरिक इन बलिदानियों का ऋणी रहेगा।
खटीमा से आंदोलन को मिली नई दिशा
धामी ने राज्य आंदोलन से जुड़े अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि खटीमा गोलीकांड के बाद अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को नई दिशा मिली। लोगों में अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का हौसला बढ़ा। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के सपनों के मुताबिक राज्य का निर्माण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
खटीमा को बताया आंदोलन की अहम जमीन
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा की जमीन उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में बेहद अहम है। आंदोलन के दौरान खटीमा, मसूरी व रामपुर तिराहा जैसी घटनाओं में आंदोलनकारियों ने अपनी जान दी। उनके संघर्ष, त्याग व बलिदान की वजह से उत्तराखंड राज्य बना।

आंदोलनकारियों को 10 फीसदी आरक्षण
धामी ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के चिन्हित आन्दोलनकारियों या उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण अधिनियम, 2023 लागू किया गया है।
शहीदों के आश्रितों की पेंशन बढ़ी
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों की मासिक पेंशन 3000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये की गई है। आंदोलन के दौरान घायल या जेल गए आंदोलनकारियों को 7000 रुपये, जबकि सक्रिय आंदोलनकारियों को 5500 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। चिन्हित आंदोलनकारियों को पहचान पत्र के साथ सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी दी जा रही है।
महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण
धामी ने राज्य आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि अलग राज्य की मांग को लेकर चले आंदोलन में मातृशक्ति ने बड़ी भूमिका निभाई। सरकार ने महिलाओं के योगदान को देखते हुए सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू किया है।

UCC से लेकर भर्ती तक का जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उत्तराखंड के विकास से जुड़े कई फैसले लिए हैं। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता लागू हुई। युवाओं को भर्ती परीक्षाओं में नकल से बचाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। सरकार के मुताबिक पिछले पांच साल में 34 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है।
अतिक्रमण पर भी सरकार का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की संस्कृति व मूल स्वरूप को बचाने के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून व दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। अतिक्रमण के खिलाफ चले अभियान में 13 हजार एकड़ से ज्यादा सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने का दावा भी उन्होंने किया।

जनप्रतिनिधियों ने भी रखी बात
कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक खटीमा भुवन कापड़ी व विधायक नानकमत्ता गोपाल सिंह राणा ने भी संबोधित किया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक रुद्रपुर शिव अरोरा, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी, दर्जाधारी राज्य मंत्री सुभाष बरथवाल, डॉ. अनिल कपूर डब्बू, किशन सिंह किन्ना, गंभीर सिंह धामी, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी, मोहिनी पोखरिया, मोहन पाठक, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, पूर्व विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।






