
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 30 जून 2026:
उत्तराखंड में मंगलवार को मदरसा बोर्ड अपने अंतिम कार्य दिवस से गुजरा। राज्य सरकार के फैसले के मुताबिक 1 जुलाई से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। उसकी जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण आधिकारिक तौर पर कामकाज संभालेगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के पंजीकरण, मान्यता, संचालन, पाठ्यक्रम, शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े सभी अधिकार नए प्राधिकरण के पास होंगे।

सरकार के मुताबिक प्रदेश के 452 पंजीकृत मदरसों समेत सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अब नए प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। नई व्यवस्था का मकसद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही, गुणवत्ता, समान शैक्षणिक मानकों को लागू करना है, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक, रोजगार आधारित, प्रतिस्पर्धी शिक्षा का बेहतर माहौल मिल सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026 के बजट सत्र में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की घोषणा की थी। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को सरकार ने बोर्ड को खत्म करने, नए प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना जारी की। 5 फरवरी को इसकी संरचना, अधिकार, कार्यप्रणाली का भी औपचारिक ब्योरा जारी कर दिया गया था।
Uttarakhand State Minority Education Authority के अध्यक्ष के रूप में प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी की नियुक्ति की गई है। सदस्य के तौर पर प्रो. राकेश जैन, डॉ. सैय्यद अली हमीद, प्रो. पेमा तेनजिन, डॉ. एल्बा मेड्रेले, प्रो. रोबिना अमन, प्रो. गुरमीत सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस चंद्रशेखर भट्ट, राजेंद्र सिंह बिष्ट को शामिल किया गया है। शिक्षा महानिदेशक, निदेशक एससीईआरटी पदेन सदस्य होंगे, जबकि निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण को पदेन सदस्य सचिव बनाया गया है।

नई व्यवस्था लागू होने से पहले सरकार के सामने कई अहम चुनौतियां भी हैं। इनमें सभी मदरसों का तय समय में पंजीकरण, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत शैक्षणिक सुविधाएं, हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना रुकावट जारी रखना शामिल है। वहीं प्रदेश में करीब 500 अपंजीकृत मदरसों के भविष्य को लेकर अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है।
सरकार का कहना है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। अल्पसंख्यक विभाग के अनुसार नई व्यवस्था लागू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर, देहरादून जैसे जिलों में विशेष निगरानी रखी जाएगी, क्योंकि प्रदेश के अधिकांश मदरसे इन्हीं जिलों में संचालित हैं।






