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Lokayukta के 50 साल पूरे, CM योगी की नसीहत- शिकायत करो, मगर झूठी नहीं, जनविश्वास से खिलवाड़ पर कसेगा शिकंजा

स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री बोले- लोकतंत्र की असली ताकत जनविश्वास, शिकायत का समयबद्ध समाधान सुशासन की कसौटी, तकनीक से राशन और राजस्व मामलों में पारदर्शिता बढ़ी

लखनऊ, 14 सितंबर 2026:

यूपी लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को भ्रष्टाचार और शिकायतों के साथ-साथ शिकायत करने वालों को भी आईना दिखाया। गोमतीनगर स्थित लोक आयुक्त कार्यालय में आयोजित समारोह में सीएम योगी ने साफ कहा कि शिकायत करना अधिकार है लेकिन अनावश्यक और झूठी शिकायतों को व्यवस्था का हथियार नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत किसी संस्था से जुड़ा सामान्यजन का विश्वास है और जनविश्वास पर खरा उतरना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी कसौटी है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर लोक आयुक्त प्रशासन की स्मारिका और सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस की असली कसौटी यह है कि आम व्यक्ति किसी संस्था के पास बेझिझक पहुंचे और उसे नियमानुसार, समयबद्ध परिणाम मिले। शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण जरूरी है लेकिन इसके साथ अनावश्यक शिकायत करने वालों पर भी शिकंजा कसना होगा।

‘झूठी शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए’

सीएम योगी ने आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन और जनता दर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि इन माध्यमों से लगातार जनसमस्याओं का समाधान किया जा रहा है। हालांकि कुछ लोग बिना किसी व्यक्तिगत समस्या के सिर्फ दूसरों के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंचते हैं। उन्होंने एक विद्यालय से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए बताया कि जांच में शिकायत झूठी निकलने के बाद शिकायतकर्ता ने पूरे जिले के विद्यालयों की जांच कराने की मांग कर दी। योगी ने कहा कि ऐसी झूठी शिकायतों को खारिज किया जाना चाहिए।

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तकनीक ने राशन व्यवस्था में लगाई लगाम

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में जनता दर्शन में 100 में से करीब 60 शिकायतें पीडीएस यानी राशन वितरण से जुड़ी होती थीं। ई-पॉस मशीनों को मुख्यालय की निगरानी व्यवस्था से जोड़ने के बाद राशन वितरण में गड़बड़ी की तत्काल जानकारी मिलने लगी। 80 हजार राशन दुकानों की व्यवस्था में तकनीकी निगरानी से हेराफेरी की गुंजाइश लगभग शून्य हो गई।

34 लाख राजस्व मामलों का हुआ निस्तारण

सीएम ने बताया कि 2017 में भूमि विवाद, पैमाइश, वरासत और नामांतरण से जुड़े करीब 34 लाख मामले लंबित थे। केवल वरासत के लगभग छह लाख मामले थे। समयसीमा तय कर इनका निस्तारण कराया गया। साढ़े नौ साल में 34 लाख मामलों का निस्तारण हुआ। हालांकि इसी अवधि में नौ लाख नए मामले भी सामने आए। लैंड यूज से जुड़े मामलों में 30 दिन में समाधान न होने पर डीम्ड व्यवस्था और जवाबदेही तय करने की बात भी उन्होंने बताई।

‘रोबोट’ से पैमाइश में पारदर्शिता का दावा

पैमाइश में जरीब के साथ छेड़छाड़ की शिकायतों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर तहसील में रोबोट उपलब्ध कराया गया है। इससे पैमाइश में पारदर्शिता बढ़ी है और एक इंच भी इधर-उधर करने की गुंजाइश नहीं है। सीएम ने कहा कि तकनीक शिकायतों के अंबार से मुक्ति का रास्ता बन सकती है। लोक आयुक्त संगठन के पास शिकायत पहुंचने पर उसका मेरिट के आधार पर समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ताकत मिलने पर किसी व्यक्ति का उदंड व्यवहार भी व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए उस पर अंकुश जरूरी है।
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14 सितंबर 1977 से शुरू हुई यात्रा

उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को शुरू हुआ था। न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने संगठन को शुरुआती नेतृत्व दिया। पांच दशक की यात्रा पूरी कर चुका संगठन अब लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र की अध्यक्षता में आगे बढ़ रहा है। समारोह में संगठन की पांच दशक की विकास यात्रा और उपलब्धियों पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थाएं तभी मजबूत होती हैं जब जनता का भरोसा उनके साथ हो। जनधन खातों से लेकर डीबीटी तक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत है। समारोह में लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोक आयुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार यादव, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, डीजीपी राजीव कृष्ण समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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