
लखनऊ, 14 सितंबर 2026:
यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर निर्वाचन आयोग ने मशीनरी को पूरी तरह अलर्ट मोड पर ला दिया है। ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) को चुनावी तैयारियों का अहम शुरुआती चरण मानते हुए सोमवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रूपाम) में 33 जिलों के निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों को तकनीकी और प्रशासनिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग ने की।
आयोग का फोकस सिर्फ ईवीएम की तकनीकी जांच तक सीमित नहीं रहा। एफएलसी से लेकर चुनाव के दौरान मशीनों की आवाजाही, रैंडमाइजेशन, कमीशनिंग और मतगणना तक हर स्तर पर पारदर्शिता और प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
मनीष गर्ग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीएम) को निर्देश दिया कि चुनावी तैयारियों की अब नियमित समीक्षा की जाए और प्रतिदिन कुछ समय निर्वाचन कार्यों के लिए निर्धारित किया जाए। उन्होंने एफएलसी के बाद ओके मशीनों की सूची राजनीतिक दलों के साथ साझा कर विधिवत अभिस्वीकृति लेने के निर्देश दिए। अभ्यर्थियों के अंतिम रूप से निर्धारित होने के बाद कमीशनिंग से पहले यही सूची उन्हें भी उपलब्ध कराने को कहा गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एफएलसी की प्रक्रिया, राजनीतिक दलों की सहभागिता और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुपालन की जानकारी सार्वजनिक की जाए। एफएलसी के शुभारंभ और समापन को लेकर प्रेस नोट भी जारी किए जाएं। वीवीपैट स्लिप की निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिदिन श्रेडिंग और निस्तारण के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण श्रेडर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

EVM की आवाजाही पर भी कड़ा पहरा
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना ईवीएम की कोई आवाजाही न हो। मशीनों की आवाजाही में जीपीएस ट्रैकिंग और निर्धारित मार्ग का पालन अनिवार्य होगा। उन्होंने एफएलसी स्थलों के नियमित निरीक्षण, सुपरवाइजर की लगातार मौजूदगी और कंट्रोल रूम को मजबूत रखने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि एफएलसी जितनी मजबूत, पारदर्शी और व्यवस्थित होगी, चुनाव की आगे की प्रक्रिया उतनी ही सुचारू होगी। राजनीतिक दलों को एफएलसी की तारीखों की समय से सूचना देने और सभी अभिलेख व्यवस्थित रखने के भी निर्देश दिए गए।
मशीनों की ‘पूरी जिंदगी’ का दिया गया प्रशिक्षण
कार्यशाला में बीईएल के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को ईवीएम के संपूर्ण जीवन चक्र की जानकारी दी। इसमें मशीनों का संचालन, रैंडमाइजेशन, कमीशनिंग, मतदान, मतगणना और मतगणना के बाद की प्रक्रियाएं शामिल रहीं। ईवीएम की तकनीकी संरचना और सुरक्षा विशेषताओं के साथ एफएलसी के दौरान आने वाली सामान्य त्रुटियों और उनसे बचने की सावधानियां भी समझाई गईं।
कार्यशाला स्थल पर ईवीएम और वीवीपैट के जरिए हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग कराई गई। अधिकारियों ने स्वयं मशीनों का संचालन कर निर्धारित प्रक्रियाओं का अभ्यास किया। इसके बाद प्रतिभागियों का मूल्यांकन भी किया गया।
वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग की अध्यक्षता में ईवीएम की एफएलसी ( फर्स्ट लेवल चेकिंग) से संबंधित कार्यशाला का लखनऊ में हुआ आयोजन
33 जनपदों से संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों को तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण प्रदान किया गया
लखनऊ, 14 सितम्बर 2026।… pic.twitter.com/3ln1fmaItt— CEO Uttar Pradesh (@ceoup) September 14, 2026
यह एफएलसी प्रशिक्षण श्रृंखला का अगला चरण है। इससे पहले 19 अगस्त को गौतमबुद्धनगर में 21 जिलों और 11 सितंबर को वाराणसी में 21 जिलों के अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं। सोमवार की कार्यशाला में अयोध्या, लखनऊ, कानपुर नगर, मुरादाबाद, झांसी, सुलतानपुर समेत 33 जिलों के अधिकारी और एफएलसी सुपरवाइजर शामिल हुए। कार्यशाला में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी अखंड प्रताप सिंह, भारत निर्वाचन आयोग के प्रमुख सचिव बीसी पात्रा, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमित सिंह समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






