
लखनऊ, 27 सितंबर 2026:
तीन दिन से लगातार हो रही बारिश ने नवाबी दौर की ऐतिहासिक विरासत के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। यूपी की राजधानी लखनऊ में बारिश के बीच पुराने और जर्जर भवनों के हिस्से गिरने लगे हैं। पुराने शहर के ऐतिहासिक छोटे इमामबाड़े के मुख्य गेट के ऊपर बना नक्काशीदार हिस्सा भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वहां कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। घटना के बाद प्रशासन ने एहतियातन गेट के आसपास बल्लियां और बैरिकेडिंग लगाकर पर्दा कर दिया और आवाजाही रोक दी है।
छोटा इमामबाड़ा लखनऊ की नवाबी विरासत की प्रमुख पहचान है। ऐसे में इसके मुख्य प्रवेश द्वार के जर्जर हिस्से के गिरने से ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। हुसैनाबाद ट्रस्ट के सचिव की जिम्मेदारी संभालने वाले एडीएम के मुताबिक मौके पर पहले से मरम्मत का काम चल रहा था। सिटी मजिस्ट्रेट ने मौके का निरीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि मौसम सुधरने पर गेट की मरम्मत कराई जाएगी।
हालांकि रॉयल फैमिली ऑफ अवध के एक पदाधिकारी ने हुसैनाबाद ट्रस्ट पर ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और संरक्षण में लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गेट कई वर्षों से जर्जर हालत में था और इसकी मरम्मत के लिए समय-समय पर आवाज उठाई जाती रही लेकिन इस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हादसे के बाद उन्होंने प्रशासन से गेट की मरम्मत कराने के साथ आसपास का अतिक्रमण हटाने की मांग की।

कैसरबाग में 150 साल पुराने भवन की छत ढही
बारिश के बीच कैसरबाग में भी एक पुरानी इमारत का हिस्सा ढह गया। करीब 150 साल पुराने होम्योपैथिक डिस्पेंसरी भवन की छत का एक हिस्सा गिरने से यहां काम करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों में दहशत फैल गई। यह भवन कुछ समय पहले से राजकीय नेशनल होम्योपैथिक कॉलेज को आवंटित है। इसमें होम्योपैथिक डिस्पेंसरी संचालित होती है।
खास बात यह है कि इस भवन में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। इसी जर्जर भवन में जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी और एक अन्य कार्यालय भी संचालित हो रहा है। प्रांतीय होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा संघ और उप्र राजकीय होम्योपैथिक फार्मेसी सेवा संघ के कार्यालय भी इसी भवन में हैं। लगातार बारिश ने इन पुरानी इमारतों की कमजोर होती हालत को सामने ला दिया है।






