
लखनऊ, 2 अक्टूबर 2026:
यूपी के लखनऊ में Dial-108 और Dial-102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने नौकरी से निकाले जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर पहुंचे कर्मचारियों ने कोरोना काल में अपनी सेवाओं का हवाला देते हुए नौकरी बहाल करने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि महामारी के दौरान फ्रंटलाइन पर काम करने के बाद भी करीब 9 हजार लोगों को 2021 में नौकरी से बाहर कर दिया गया।
पांच साल से रोजगार की लड़ाई
एम्बुलेंस संघ उत्तर प्रदेश के महामंत्री नीतिश कुमार ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का काम किया। कई कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण के दौरान मौत भी हुई, लेकिन उनके परिवारों को सम्मान या मुआवजा नहीं मिला। नौकरी जाने के बाद कर्मचारी पिछले पांच साल से रोजगार के लिए भटक रहे हैं। कर्मचारियों को कोरोना वॉरियर कहकर सम्मान पत्र दिए गए थे। अब जब नौकरी ही नहीं है तो उन प्रमाण पत्रों का क्या करेंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। कई लोग बच्चों की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री से मांगा था समय
कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात के लिए समय मांगा था। उन्हें दिया गया समय भी पूरा हो चुका है, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी के चलते 2 अक्टूबर को कर्मचारियों ने लखनऊ में प्रदर्शन का फैसला किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी रोजगार के लिए कई बार लखनऊ पहुंच चुके हैं। लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

चारबाग में साथियों को हिरासत में लेने का आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हजरतगंज पहुंचने से पहले चारबाग रेलवे स्टेशन पर 40 से 50 कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद लखनऊ पहुंचे कर्मचारियों ने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, नारेबाजी की। यहां भी पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कर्मचारी अपने रोजगार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर नौकरी बहाली का रास्ता निकालने की मांग की।
बोले- बुलडोजर से डरने वाले नहीं
संघ के नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों का रोजगार छीना गया है, इसलिए वे अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी बुलडोजर से डरने वाले नहीं हैं। जिन लोगों की वजह से उनके घरों का चूल्हा बुझा है, उन्हें इसका जवाब देना होगा। कहा कि जरूरत पड़ी तो कर्मचारी भूख हड़ताल करेंगे। रोजगार वापस मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कहते हुए नीतिश ने कहा कि पांच साल से परिवारों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, इसलिए अब कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं हैं।






