
लखनऊ, 13 सितंबर 2026:
हौसला बुलंद हो तो बर्फीली चोटियां भी रास्ता छोड़ देती हैं। लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश लेकर 5,826 मीटर ऊंची माउंट रुद्रगैरा चोटी फतह कर एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। पूर्वा ने गत 10 सितंबर को रुद्रगैरा के शिखर पर भारतीय तिरंगा फहराया। कठिन बर्फीले और चट्टानी रास्तों, बेहद कम ऑक्सीजन और शारीरिक थकान के बीच हासिल की गई यह कामयाबी अब उनके अगले और सबसे बड़े लक्ष्य माउंट एवरेस्ट फतह करने की ओर कदम हैं।
योगी से मुलाकात को बनाया प्रेरणा
पूर्वा का पर्वतारोहण अभियान सिर्फ चोटियों को जीतने तक सीमित नहीं है। मई 2018 में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का बैनर सौंपा था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें शुभकामनाएं देकर हौसला बढ़ाया था। रुद्रगैरा की सफलता का श्रेय पूर्वा ने अपने परिवार के सहयोग के साथ मुख्यमंत्री की प्रेरणा को भी दिया है।
इस अभियान में शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा की भी अहम भूमिका रही। उन्हीं के मार्गदर्शन में पूर्वा ने गंगोत्री में विशेष प्रशिक्षण हासिल किया और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार किया।

दो दिन की ट्रेकिंग, फिर 1,300 मीटर की खड़ी चढ़ाई
पूर्वा, शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा ने 7 सितंबर को सुबह नौ बजे गंगोत्री से ट्रेक शुरू किया। दो दिन की चुनौतीपूर्ण यात्रा के बाद टीम 4,350 मीटर की ऊंचाई पर रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। इसके बाद 10 सितंबर की सुबह चार बजे समिट पुश शुरू हुआ।
करीब आठ घंटे 30 मिनट की लगातार कठिन
चढ़ाई के दौरान टीम ने लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई हासिल की और दोपहर 12:30 बजे रुद्रगैरा के शिखर पर पहुंच गई। रास्ते में खड़ी बर्फ, चट्टानी हिस्से और कठिन खुले सेक्शन थे। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और थकान चुनौती बढ़ाती रही, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी।

‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ से स्वच्छ हिमालय का संदेश
पूर्वा ने अपने अभियान को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ पहल के जरिए वह पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता और जिम्मेदार पर्वतारोहण का संदेश दे रही हैं। उनका मानना है कि हिमालय की चोटियों को जीतना जितना गौरवपूर्ण है उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
रुद्रगैरा पर तिरंगा फहराने के बाद अब पूर्वा का मिशन एवरेस्ट है। 8,848.86 मीटर ऊंचे दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर भारतीय तिरंगा फहराने के साथ वह महिला सशक्तीकरण, युवाओं को प्रेरणा और ‘स्वच्छ हिमालय’ का संदेश दुनिया तक पहुंचाना चाहती हैं।






