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अब जेब में नहीं, मोबाइल में रहेगा Lucknow University का ID Card, DigiLocker पर मिलेगा डिजिटल पहचान पत्र

वर्ष 2026-27 से छात्रों को बड़ी राहत : लखनऊ विश्वविद्यालय जारी करेगा आधिकारिक डिजिटल आई-कार्ड, QR कोड से होगा सत्यापन, APAAR ID होना अनिवार्य, पढ़ाई पूरी होते ही ID होगी निष्क्रिय

लखनऊ, 31 अगस्त 2026:

लखनऊ विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। अब उन्हें विश्वविद्यालय का आई-कार्ड लेकर हर जगह घूमने की जरूरत नहीं होगी। आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लखनऊ विश्वविद्यालय अपने मुख्य परिसर, द्वितीय परिसर और सभी संकायों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के आधिकारिक आई-कार्ड को भारत सरकार के DigiLocker प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने जा रहा है। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय खुद इस डिजिटल आई-कार्ड का Issuing Authority होगा।

लखनऊ विश्वविद्यालय का दावा है कि DigiLocker पर विद्यार्थियों के आधिकारिक पहचान पत्र जारी करने वाला वह देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है। यह पहल डिजिटल इंडिया मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तकनीक आधारित और विद्यार्थी केंद्रित विजन के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा छात्रों को मिलेगा क्योंकि पहचान पत्र से जुड़ी कई कागजी और भौतिक प्रक्रियाओं से उन्हें राहत मिल सकेगी।

APAAR ID के बिना नहीं मिलेगा डिजिटल आई-कार्ड

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डिजिटल आई-कार्ड की सुविधा लेने के लिए विद्यार्थियों के पास भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त APAAR ID होना अनिवार्य होगा। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने और फीस जमा होने के बाद अधिकृत डिजिटल पहचान पत्र छात्र के DigiLocker अकाउंट में उपलब्ध कराया जाएगा। यानी नए सत्र में छात्रों के लिए APAAR ID की उपयोगिता और बढ़ने वाली है।

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मोबाइल में 24 घंटे रहेगा यूनिवर्सिटी का पहचान पत्र

नई व्यवस्था के बाद छात्रों को कार्ड खोने, टूटने, फटने या चोरी होने की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाएगी। DigiLocker ऐप के जरिए आधिकारिक डिजिटल आई-कार्ड स्मार्टफोन में हमेशा उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर छात्र इसे डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत कर सकेंगे।

QR कोड बताएगा आई-कार्ड असली है या नहीं

डिजिटल आई-कार्ड में QR कोड भी होगा। इसके जरिए अधिकृत संस्थान या एजेंसी आई-कार्ड की प्रामाणिकता का डिजिटल सत्यापन कर सकेगी। इससे फर्जी या पुराने पहचान पत्रों के इस्तेमाल पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

डिग्री पूरी होते ही बंद हो जाएगा पुराना डिजिटल आईडी

विश्वविद्यालय की नई व्यवस्था में डिजिटल आई-कार्ड को छात्र की अध्ययन अवधि से जोड़ा जाएगा। पढ़ाई पूरी होने के बाद संबंधित डिजिटल पहचान पत्र की वैधता समाप्त कर उसे निष्क्रिय कर दिया जाएगा। इससे पुराने आई-कार्ड के अनधिकृत इस्तेमाल की आशंका कम होगी।

पेपरलेस कैंपस और ग्रीन कैंपस की ओर बड़ा कदम

डिजिटल आई-कार्ड से सिर्फ छात्रों को सुविधा ही नहीं मिलेगी, बल्कि विश्वविद्यालय को पेपरलेस और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था की ओर बढ़ने में भी मदद मिलेगी। PVC कार्ड और लेमिनेशन के इस्तेमाल में कमी आने से प्लास्टिक की खपत घटेगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय तकनीक आधारित, पारदर्शी और विद्यार्थी हितैषी गुड गवर्नेंस की दिशा में लगातार नए कदम उठा रहा है। उनके अनुसार DigiLocker पर विश्वविद्यालय द्वारा जारी डिजिटल पहचान पत्र विद्यार्थियों को 24 घंटे सुलभ और सुरक्षित डिजिटल पहचान देगा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेपरलेस, त्वरित तथा तकनीक-संचालित बनाने में मदद करेगा।

विश्वविद्यालय की आईटी टीम ने डिजिटल आई-कार्ड व्यवस्था के लिए आवश्यक तकनीकी एकीकरण पूरा कर लिया है। विद्यार्थियों के लिए जल्द ही इसके इस्तेमाल और प्रक्रिया से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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