
लखनऊ, 3 सितंबर 2026:
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में एक बार फिर बड़ा सियासी संदेश दिया। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में मायावती ने जहां पूरे देश में होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान किया, वहीं अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी से फिलहाल दूर रखने का फैसला किया। आकाश को बैठक में भी नहीं बुलाया गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उनका नेशनल को-ऑर्डिनेटर का पद भी वापस ले लिया गया है। हालांकि, उन्हें पार्टी से बाहर नहीं किया गया है और वह बसपा में कार्यकर्ता के तौर पर काम करते रहेंगे।
मायावती ने आकाश को राजनीतिक रूप से अभी और परिपक्व होने की जरूरत बताई। उन्होंने इस फैसले को बसपा संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों से जोड़ते हुए कहा कि कांशीराम ने परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम में शामिल होने की अनुमति जरूर दी थी लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या संगठन में बड़े पद देने के पक्ष में नहीं थे। मायावती ने कहा कि वह भी इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रही हैं।
आकाश बैठक से नदारद, छोटे भाई ईशान की एंट्री ने बढ़ाई सियासी हलचल
बैठक में आकाश आनंद की गैरमौजूदगी के बीच उनके छोटे भाई ईशान की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को नया रंग दे दिया। ईशान पहली बार राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में पहुंचे। वह बसपा का पटका पहने अपने पिता आनंद कुमार के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और मायावती के बैठने तक उनके साथ खड़े रहे। हालांकि ईशान इससे पहले वर्ष 2024 में मायावती के जन्मदिन के मौके पर आकाश के साथ पार्टी कार्यालय पहुंच चुके हैं।
ईशान के अलावा बसपा के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश सिंह भी बैठक में शामिल हुए। खास बात यह है कि तीन दिन पहले ही मायावती ने दोनों को पार्टी में लॉन्च किया था। ऐसे में एक तरफ आकाश को बड़ी जिम्मेदारी से दूर किया जाना और दूसरी तरफ नई पीढ़ी के चेहरों को सामने लाना बसपा की भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

दो बार निष्कासन, दो बार वापसी… फिर जिम्मेदारी वापस
आकाश आनंद का बसपा में राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 2019 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई जनसभाओं को संबोधित किया। मई 2024 में सीतापुर की एक जनसभा में आक्रामक भाषण के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से हटा दिया था। बाद में उनकी वापसी हुई।
मार्च 2025 में आकाश को फिर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उस समय मायावती ने कहा था कि अब उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। हालांकि बाद में आकाश की फिर वापसी हुई और अगस्त 2025 में उन्हें दोबारा राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई। हाल में हाथरस की चुनावी रैली में उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला किया था। अब एक बार फिर संगठन की बड़ी जिम्मेदारी उनसे वापस ले ली गई है। आकाश ने अपने एक्स अकाउंट से पद हटाकर खुद को सिर्फ ‘बसपा कार्यकर्ता’ बताया है।

‘सभी चुनाव अकेले लड़ेगी बसपा’, गठबंधन की राजनीति से दूरी
बैठक में मायावती ने साफ कर दिया कि बसपा अब देशभर में छोटे-बड़े सभी चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना है। इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है। कांग्रेस पर भी उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए उसे दलित और आंबेडकर विरोधी पार्टी बताया।
आरएसएस और मोहन भागवत पर भी निशाना
मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जातिवाद, असमानता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आरएसएस की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने आरएसएस से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी और समतामूलक संविधान में पूरी आस्था रखते हुए उसके अनुरूप काम करने की सलाह दी।
बी.एस.पी. द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति-दिनांक 03.09.2026
(1) बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कु. मायावती जी द्वारा आज बी.एस.पी. की आल-इण्डिया की हुई बैठक में पार्टी व मूवमेन्ट से सम्बन्धित पिछले दिये गये कार्यो की समीक्षा व कमियों को दूर करने तथा आगे के हर वर्ष सालाना…— Mayawati (@Mayawati) September 3, 2026
महंगाई से लेकर Gen-Z और Gen-Alpha तक की चिंता
मायावती ने दुनिया के कई हिस्सों में जारी युद्ध और बदलते सुरक्षा हालात के बीच भारत की नीति और रणनीति मजबूत करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने बढ़ती महंगाई, प्राकृतिक आपदाओं और Gen-Z व Gen-Alpha की गंभीर समस्याओं पर भी केंद्र और राज्य सरकारों से गंभीरता से काम करने की अपील की।
पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को दिया ये संदेश
बैठक में संगठन को मजबूत करने, कमियों को दूर करने और पदाधिकारियों को पूरी निष्ठा से काम करने के निर्देश दिए गए। कांशीराम की पुण्यतिथि पर देशभर में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती के ताजा फैसले ने बसपा की राजनीति में आकाश आनंद की भूमिका, परिवार की अगली पीढ़ी और पार्टी की चुनावी रणनीति को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।






