
लखनऊ, 12 सितंबर 2026:
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पार्टी में परिवारवाद को लेकर एक बार फिर बड़ा और बेहद स्पष्ट फैसला सुनाया है। उन्होंने ऐलान किया है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं भविष्य में आनंद कुमार के बच्चों की अगली पीढ़ी को भी पार्टी में उनकी जिम्मेदारी सौंपने का रास्ता बंद रहेगा। मायावती ने कहा कि जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं लेकिन अंतिम जिम्मेदारी उसकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता के आधार पर ही तय होगी।
मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी लंबी पोस्ट में कहा कि बसपा संगठन में नई पीढ़ी और युवाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सर्वसमाज के कर्मठ और युवा चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने संगठन में जेन-जी को करीब 50 प्रतिशत तक भागीदारी देने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया।
बसपा सुप्रीमो ने अपने फैसले को कांशीराम की परिवारवाद-विरोधी नीति से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने भी अपने भाई-बहनों और उनके परिवार के युवा सदस्यों को पार्टी के काम तक सीमित रखा और उन्हें सांसद, विधायक, मंत्री अथवा अन्य राजनीतिक लाभ के पदों से दूर रखा। मायावती ने कहा कि उनका पूरा ध्यान बहुजन समाज के हित, कल्याण और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने पर है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अविवाहित होने और सुरक्षा संबंधी जरूरतों के कारण उन्हें अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखना पड़ा। आनंद कुमार उनकी देखरेख के साथ-साथ उनकी निगरानी में पार्टी की अहम जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। लेकिन अब उनके परिवार के सदस्यों को इसका राजनीतिक लाभ मिलना पार्टी और आंदोलन के हित में उचित नहीं होगा।
मायावती ने कहा कि यदि भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए किसी सदस्य की जरूरत होती है तो वह अपनी बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं, जो फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। यदि वह इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होतीं तो पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है। आनंद कुमार के बेटों और आगे उनके बच्चों को यह जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
1. वैसे तो बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, किन्तु अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब…
— Mayawati (@Mayawati) September 12, 2026
अपने संदेश में मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों, संगठनों और ‘जातिवादी मीडिया’ व सोशल मीडिया के कथित प्रोपेगंडा से सावधान रहने को कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा को उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने से रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
मायावती ने पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही एक और खबर को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बसपा से निष्कासित नेताओं की वापसी की खबर पूरी तरह गलत और फेक न्यूज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों को बसपा में वापस नहीं लिया जाएगा।
इस पूरे संदेश के राजनीतिक मायने इसलिए भी अहम हैं क्योंकि मायावती ने एक तरफ युवाओं और नई पीढ़ी को संगठन में बड़ी भूमिका देने का संकेत दिया है, वहीं दूसरी तरफ अपने परिवार को राजनीतिक उत्तराधिकार से दूर रखने का दावा दोहराया है। चुनावी राजनीति के बीच उनका यह संदेश बसपा के संगठनात्मक पुनर्गठन और नेतृत्व की अगली पीढ़ी तैयार करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।






