
लखनऊ, 3 अगस्त 2026:
यूपी विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने इसके स्वरूप और अवधि को लेकर सवाल उठाए हैं। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक लंबे पोस्ट में उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र संसद के मौजूदा सत्र की तरह संकीर्ण दलगत राजनीति, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की भेंट न चढ़े अपितु जनहित और जनकल्याण के मुद्दों पर सार्थक चर्चा का मंच बने।
मायावती ने कहा कि इस मानसून सत्र में कुल चार कार्य दिवस निर्धारित हैं और 4 अगस्त को राज्य सरकार विधानसभा में सरकारी खर्च से संबंधित अनुपूरक बजट पेश करेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने संक्षिप्त सत्र में क्या विधानसभा अपने वास्तविक संवैधानिक उद्देश्य को पूरा कर पाएगी या फिर यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगी।
बसपा प्रमुख ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अफसरशाही को संविधान की शपथ के प्रति जवाबदेह और जनहित व जनकल्याण के प्रति उत्तरदायी बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि विधायिका का संवैधानिक प्रभाव किसी भी स्थिति में कमजोर न पड़े। उनका मानना है कि विधानसभा के लगातार घटते सत्र लोकतांत्रिक जवाबदेही को प्रभावित कर सकते हैं।
मायावती ने सरकार और विपक्ष दोनों से गंभीर संसदीय आचरण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि संविधान, लोकतंत्र और जनता के हितों की मजबूती के लिए सदन में सकारात्मक, तथ्यपरक और जनसमस्याओं पर केंद्रित चर्चा होना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सत्र राजनीतिक टकराव के बजाय जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा।






