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छोटी दीपावली के नाम से भी जानी जाती नरक चतुर्दशी, जानिए अभ्यंग स्नान का महत्व

धनतेरस के बाद व दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाता यह त्योहार, इसे रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन किया था अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध

न्यूज डेस्क, 6 नवंबर 2026:

दीपावली पांच दिनों का त्योहार है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाईदूज के साथ होता है। इन पांच दिवसीय पर्व के दौरान नरक चतुर्दशी का विशेष महत्व है। इसे छोटी दीपावली, रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। नरक चतुर्दशी का त्योहार धनतेरस के बाद और दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण व यमराज की पूजा की जाती है। इस दिन अभ्यंग स्नान की भी परंपरा है। आइए जानते हैं नरक चतुर्दशी मनाने का क्या उद्देश्य है और इसके पीछे कौन सी पौराणिक कथा है।

पहली पौराणिक कथा

इतिहासकारों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध करके हजारों बंदी महिलाओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इस विजय की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था। इसी कारण यह दिन दीपोत्सव की परंपरा से जुड़ गया। मान्यता है कि नरकासुर के वध के बाद लोगों ने खुशी में दीपक जलाकर उत्सव मनाया। इसी घटना को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि नरक चतुर्दशी को दीप जलाने और खुशियां मनाने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर लोग घर के आंगन, मंदिरों और मुख्य द्वार पर दीपक जलाते हैं। इस दिन दीपक जलाने से घर में व्याप्त नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। दीपक को अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।

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दूसरी पौराणिक कथा

नरक चतुर्दशी को लेकर एक अन्य कथा भी है। रन्ति देव नामक एक धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था, लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके सामने यमदूत आ गए। यमदूत को देखकर राजा अचम्भित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप मुझे लेने क्यों आए हो। राजा ने यमदूत से पूछा, कृपया बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। राजा की अनुनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा, राजन एक बार आपके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण लौट गया यह उसी पाप कर्म का फल है।

राजा ने यमदूत से विनती की कि मुझे कुछ और समय दे दे। इस पर यमदूत ने राजा को एक वर्ष का समय दे दिया। राजा अपनी समस्या लेकर ऋषियों के पास पहुंचा और उन्हें सारी कहानी बताई। उन्होंने ऋषियों से पूछा कि कृपया इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय है। ऋषियों ने कहा कि आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनसे उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति के लिए भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है।

छोटी दीपावली के नाम से भी जानी जाती नरक चतुर्दशी, जानिए अभ्यंग स्नान का महत्व (2)

यम दीपदान

धार्मिक मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इस दिन दीपदान करते समय भगवान यमराज से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्रार्थना की जाती है। दीपक जलाने के बाद उसे पलट कर नहीं देखना चाहिए।

नरक चतुर्दशी का दूसरा नाम रूप चौदस

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस या रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। इसके पीछे शरीर की सुंदरता, स्वच्छता और आरोग्य से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं। इस दिन सुबह जल्दी उठकर तेल मालिश और उबटन लगाने के बाद स्नान (अभ्यंग स्नान) करने की परंपरा है। माना जाता है कि ऐसा करने से शरीर में निखार आता है और व्यक्ति का रूप सुंदर बनता है।

क्या करें

भगवान श्रीकृष्ण की घर में या मंदिर में पूजा करें। इस दिन हनुमान जी और मां काली की पूजा करना भी बहुत फलदायी माना जाता है। रात के समय घर के विभिन्न स्थानों (मंदिर, तुलसी, रसोई, मुख्य द्वार आदि) पर दीये जलाएं। सूर्य देव को अर्घ्य दें।

क्या न करें

इस दिन किसी भी जीव-जंतु की हत्या या उन्हें नुकसान न पहुंचाएं। यमराज की दिशा दक्षिण मानी जाती है, इसलिए भूलकर भी इस दिन घर की दक्षिण दिशा को गंदा न रखें। शास्त्रों के अनुसार इस दिन तेल का दान करने से बचना चाहिए, इससे मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। मांस, मदिरा या किसी भी प्रकार के तामसिक व मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। घर में साफ-सफाई रखें और वाद-विवाद या लड़ाई-झगड़े से बचें। गरीब, जरूरतमंद लोगों या घर के बुजुर्गों का अपमान करने से बचें।

नरक चतुर्दशी व बड़ी दिवाली में फर्क

दोनों पर्वों का धार्मिक महत्व अलग-अलग कथाओं व परंपराओं से जुड़ा है। नरक चतुर्दशी भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय की याद में मनाई जाती है। नरक चतुर्दशी को ही छोटी दीवाली कहते हैं। बड़ी दीवाली कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाने की परंपरा है।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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