न्यूज डेस्क, 18 जून 2026:
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के सरई गांव की छह वर्षीय प्रांजलि प्रजापति आज दूसरे बच्चों की तरह स्कूल जाती है, दोस्तों के साथ खेलती है और नार्मल जिंदगी जी रही है। लेकिन कुछ समय पहले तक उसकी हालत ऐसी थी कि थोड़ी देर खेलने या चलने पर वह थक जाती थी और बार-बार बीमार पड़ जाती थी। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और बीमारी की असली वजह भी समझ नहीं पा रहा था।
गांव पहुंचे जांच दल की सलाह से आसान हुई राह
खेती पर निर्भर संतोष प्रजापति का परिवार करीब पांच से छह हजार रुपये मासिक आय में घर चलाता है। कई बार स्थानीय अस्पतालों में इलाज कराया गया, लेकिन बीमारी का कारण सामने नहीं आ सका। परिवार को यह भी पता नहीं था कि प्रांजलि जन्म से हृदय रोग से जूझ रही है। हालात तब बदले जब नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की सीएसआर पहल ‘नन्हा सा दिल’ के तहत बाल हृदय जांच दल गांव पहुंचा। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के सहयोग से लगाए गए शिविर में चिकित्सकों ने हृदय रोग की आशंका जताई और आगे जांच कराने की सलाह दी।
टेस्ट रिपोर्ट से चिंता में डूबा परिवार
इसके बाद प्रांजलि को देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित इको जांच शिविर में लाया गया। यहां श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के विशेषज्ञों ने इकोकार्डियोग्राम से कन्फर्म हुआ कि बच्ची के दिल में छेद है। यह जानकारी मिलने के बाद परिवार चिंता में डूब गया, क्योंकि इलाज और ऑपरेशन का खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं था।
सफर, रहने-खाने व ऑपरेशन की जिम्मेदारी एनसीएल ने संभाली और बदल गई तकदीर
इसी दौरान नन्हा सा दिल-एनसीएल परियोजना परिवार के लिए सहारा बनी। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि इलाज से जुड़ा पूरा खर्च एनसीएल उठाएगा। इसके बाद यात्रा, रहने, खाने, इलाज और ऑपरेशन के बाद की देखभाल तक की सारी व्यवस्था की गई। हरियाणा के पलवल स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में प्रांजलि का सफल ऑपरेशन पूरी तरह मुफ्त किया गया। इलाज के बाद अब वह स्वस्थ जीवन जी रही है।
ग्रामीण इलाकों के बच्चों के लिए शुरू हुई पहल
जन्मजात हृदय रोग बच्चों में पाए जाने वाले सामान्य जन्म दोषों में शामिल है। समय रहते पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है, लेकिन दूरदराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए जांच और इलाज तक पहुंच आसान नहीं होती। इसी जरूरत को देखते हुए वर्ष 2025 में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पतालों के साथ मिलकर सिंगरौली, सीधी और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में नन्हा सा दिल परियोजना शुरू की। इसका उद्देश्य बच्चों को जागरूकता, जांच, निदान, ऑपरेशन और इलाज के बाद की देखभाल एक ही व्यवस्था के तहत मुफ्त उपलब्ध कराना है।

एक साल में 534 शिविर, 38 हजार से ज्यादा बच्चों की जांच
पिछले एक वर्ष में इस परियोजना के तहत 534 स्क्रीनिंग शिविर लगाए गए। इनमें 38,315 बच्चों की जांच की गई। 764 बच्चों के इकोकार्डियोग्राम किए गए, जबकि 255 बच्चों की हृदय सर्जरी पूरी तरह मुफ्त कराई गई। एनसीएल के बीना अस्पताल में जन्मजात हृदय रोग की स्क्रीनिंग के लिए विशेष केंद्र भी स्थापित किया गया है। एचडी मेडिकल, अमेरिका के सहयोग से आधुनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान को मजबूत बनाया जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से रखी जा रही हर बच्चे की निगरानी
नन्हे दिल का सफर नाम से तैयार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों के इलाज की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। शुरुआती जांच से लेकर ऑपरेशन और उसके बाद के फॉलोअप तक स्वास्थ्य टीमें लगातार परिवारों से संपर्क में रहती हैं। इससे जरूरतमंद बच्चों के इलाज की प्रक्रिया बीच में रुकने की संभावना कम होती है।
कोल इंडिया का राष्ट्रीय अभियान बना ‘नन्हा सा दिल’
एनसीएल की यह पहल कोल इंडिया लिमिटेड के व्यापक नन्हा सा दिल कार्यक्रम का हिस्सा है। यह अभियान एनसीएल, एसईसीएल, सीसीएल और डब्ल्यूसीएल जैसी अनुषंगी कंपनियों के जरिए संचालित किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में इस अभियान के तहत देश के विभिन्न राज्यों में 1.75 लाख से अधिक ग्रामीण और जनजातीय बच्चों की जांच की जा चुकी है। वहीं जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित करीब 1,400 बच्चों के इलाज की व्यवस्था की गई है।






