लखनऊ, 24 मई 2026:
यूपी में आंधी, तूफान, बिजली गिरने और अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रदेश सरकार अब पूरी ताकत से अर्ली वार्निंग टू लास्ट माइल मॉडल पर काम करेगी। सीएम योगी ने स्पष्ट कहा है कि मौसम संबंधी चेतावनी केवल सरकारी फाइलों या तकनीकी सिस्टम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह अंतिम व्यक्ति तक समय रहते पहुंचनी चाहिए। सही समय पर मिली सूचना कई जिंदगियां बचा सकती है।
राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों, कस्बों और संवेदनशील क्षेत्रों में लास्ट माइल कनेक्टिविटी को युद्धस्तर पर मजबूत किया जाए। उन्होंने आईवीआरएस, पंचायत स्तर के लाउडस्पीकर, स्थानीय एफएम रेडियो, मोबाइल एसएमएस अलर्ट, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों के जरिए मौसम चेतावनियों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की रणनीति पर जोर दिया।
बैठक में 13 मई को आए भीषण आंधी-तूफान की समीक्षा प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग के मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम (एमएचईडब्ल्यूएस) ने इस आपदा की सात दिन पहले से निगरानी शुरू कर दी थी। शुरुआत में येलो वार्निंग जारी की गई जिसे हालात गंभीर होने पर ऑरेंज वार्निंग और कई जिलों में रेड अलर्ट में बदल दिया गया। चेतावनी में तेज आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाली हवाओं की आशंका जताई गई थी।

कई इलाकों में हवा की रफ्तार 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई। भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, रायबरेली, कानपुर नगर और उन्नाव समेत कई जिलों के लिए 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं को लेकर नाउकास्ट अलर्ट जारी किए गए थे। सचेत प्लेटफॉर्म के माध्यम से कलर-कोडेड अलर्ट जिला प्रशासन, डीडीएमए, आपदा मित्रों और अन्य संबंधित विभागों तक तत्काल पहुंचाए गए।
प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय मोबाइल फोनों पर लगातार एसएमएस आधारित चेतावनियां भेजी गईं। स्थानीय टीवी चैनलों, एफएम रेडियो, ग्राम प्रधानों, लेखपालों, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी बड़े स्तर पर लोगों को सतर्क किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल चेतावनी देना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ लोगों को सुरक्षित व्यवहार के प्रति जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पेड़ों, बिजली के खंभों, होर्डिंग्स और कमजोर अस्थायी ढांचों की संवेदनशीलता का स्थानीय स्तर पर आकलन कर एसओपी तैयार करने को कहा।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मौसम निगरानी के लिए 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित किए जा चुके हैं। अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार लगाए जा रहे हैं। बरेली, देवरिया और प्रयागराज में अतिरिक्त रडार की प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा लखनऊ और प्रयागराज में विंड प्रोफाइलर रडार स्थापित करने की कार्रवाई भी तेजी से आगे बढ़ रही है।






