अयोध्या, 17 अप्रैल 2026:
राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक अनुभव को और जीवंत बनाने के लिए 10 एकड़ में विकसित पंचवटी का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। इस हिस्से को इस तरह तैयार किया गया है कि यहां आने पर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास काल जैसा वातावरण महसूस हो। हरियाली से भरे इस क्षेत्र में औषधीय महत्व वाले वृक्ष लगाए गए हैं। पारंपरिक शैली की पगडंडियां, शांत विश्राम स्थल और प्राकृतिक वातावरण इसे अलग पहचान देते हैं।
पंचवटी में लगाए गए वृक्षों का चयन रामायण काल और भारतीय परंपरा में वर्णित पेड़ों के आधार पर किया गया है। यहां पांच प्रकार के प्रमुख औषधीय वृक्ष भी लगाए गए हैं। पूरे क्षेत्र को प्राकृतिक स्वरूप देने के साथ ऐसा वातावरण बनाया गया है जहां श्रद्धालु ध्यान और शांति का अनुभव कर सकें। इस परियोजना को जीएमआर कंपनी ने विकसित किया है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार पंचवटी सिर्फ एक उद्यान नहीं बल्कि रामायण काल की जीवनशैली को दिखाने वाला स्थान होगा।

इसी बीच राम मंदिर परिसर के सहायक मंदिरों और सप्तऋषि मंदिरों में पूजा व्यवस्था को सुचारु करने के लिए 16 पुजारियों की तैनाती की गई है। इनमें दो पुजारी पूर्णकालिक अर्चक के रूप में नियुक्त हुए हैं जबकि 14 को प्रशिक्षण के लिए शामिल किया गया है। पहले से नियुक्त पुजारियों से ही अब तक इन मंदिरों में पूजा कराई जा रही थी, लेकिन नियमित व्यवस्था की जरूरत को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी को स्थायी सेवा में शामिल किया जाएगा।
पंचवटी परिसर में बन रहा जलाशय अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसके पूरा होने के बाद यह क्षेत्र न सिर्फ सौंदर्य बढ़ाएगा बल्कि पक्षियों और पर्यावरण संतुलन के लिए भी उपयोगी होगा। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान प्राकृतिक वातावरण के बीच साधना और शांति का केंद्र बनेगा।






