
न्यूज डेस्क, 27 जुलाई 2026:
सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया। विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के कारण इस महत्वपूर्ण विधेयक पर पहले दिन चर्चा नहीं हो सकी। नीट पेपर लीक के विरोध में छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसद लगातार सदन में विरोध प्रदर्शन करते रहे। इससे लोकसभा की कार्यवाही दिनभर चार बार स्थगित करनी पड़ी।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद वेल में पहुंचकर बैनर और नारेबाजी करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार और विपक्ष से सहमति बनाकर विधेयक पर चर्चा कराने की अपील की। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी बातचीत की।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से छात्रों के हित में सदन चलाने और विधेयक पर चर्चा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षा सुधारों के लिए टास्क फोर्स गठित की गई है, जिसका उद्देश्य भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।

वहीं कांग्रेस ने सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर बिहार में एके-47 और दिल्ली में पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों पर जवाब दें। उनका कहना था कि सरकार इन गंभीर मुद्दों से बच रही है।
इस बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि पेपर लीक पर सबसे अधिक सवाल उठाने वाली कांग्रेस का इस विषय पर कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा से इसलिए भाग रहा है क्योंकि विस्तृत बहस में उसकी भूमिका उजागर हो जाएगी। सरकार और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन में एक बार फिर हंगामा शुरू हो गया। लगातार गतिरोध के चलते लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।






