
न्यूज डेस्क, 23 जुलाई 2026:
दिल्ली के जंतर मंतर पर कई हफ्ते से चल रहे छात्रों और युवाओं के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देशभर में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रश्नपत्र लीक के दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए सरकार फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करेगी। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में छात्रों तथा सामाजिक संगठनों का आंदोलन लगातार जारी है।

प्रधानमंत्री के बयान पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा कि युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान मौजूदा सरकार ने पहुंचाया है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर होने दिया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया। उन्होंने छात्रों की मांगों का हवाला देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों से माफी मांगने और प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित हिंसा की निष्पक्ष कार्रवाई की मांग दोहराई।

राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद अब तक 152 प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं, जिनसे करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। पेपर लीक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा यह टकराव अब सड़क से लेकर संसद तक तेज राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल फास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा पर्याप्त नहीं है बल्कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

उधर कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में आकर गंभीर बहस करने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया देना यह दर्शाता है कि सरकार दबाव में है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दों पर सरकार जवाबदेही से बच रही है।






