
राजकिशोर तिवारी
पौड़ी गढ़वाल, 24 अगस्त 2026ः
पहाड़ों पर बुनियादी सुविधाएं न होने से लोगों को अभी भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुल और रास्ते न होने से लोगों को आवाजाही में दिक्कत होती है। इसकी हकीकत सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक फोटो और वीडियो से सामने आई है। इस फोटो में दिख रहा है कि कुछ लोग एक बीमार व्यक्ति को कंधों पर उठाकर नदी पार कर करते हैं और पैदल ही अस्पताल ले जाते हैं। बताया जा रहा है कि यह मामला उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के बीरोंखाल विकासखंड के ग्राम डांगू मल्ला का है।
पहाड़ी क्षेत्रों में संपर्क मार्ग न होने से परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, खतलगढ़ के ऊपर पुल नहीं होने के कारण बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को नदी पार कर पैदल रास्ता तय करना पड़ा। मरीज को कंधों पर उठाकर ले जाने की तस्वीरों ने पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और संपर्क मार्गों की स्थिति पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौबट्टाखाल क्षेत्र में सड़क और संपर्क सुविधाओं की बदहाली का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कमलिया पल्ला गांव का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें सड़क सुविधा नहीं होने के कारण एक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को करीब पांच से छह किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर ले गया था।
समस्या का स्थायी समाधान न होने से नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि दोनों क्षेत्रों में लंबे समय से सड़क और संपर्क मार्ग की मांग की जा रही है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आता। चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के कई गांव आज भी सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इसको लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) नेता बलवंत गुसाईं ने क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज पर निशाना साधा।
‘ग्रामीणों के संघर्ष की तस्वीरें कोई नई बात नहीं’
बलवंत गुसाईं ने कहा कि चौबट्टाखाल में सड़क सुविधा के लिए ग्रामीणों के संघर्ष की तस्वीरें कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने क्षेत्र में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए धामी सरकार से स्थायी समाधान की मांग की। बहरहाल एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर पहाड़ के ग्रामीण कब तक इलाज के लिए मरीजों को कंधों पर उठाकर नदी और पैदल रास्ते पार करने को मजबूर रहेंगे?






