
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 18 जुलाई 2026ः
सांसद व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देहरादून के रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने कार्यक्रम में मोदी और धामी सरकार पर निशाना साधते हुए पेपर लीक, महंगी शिक्षा, बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। कहा कि छात्रों के सामने दो रास्ते हैं पहला मेहनत और दूसरा पेपर लीक। इस दौरान छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
युवाओं ने साझा किए अपने अनुभव
राहुल गांधी ने संवाद कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत कार्यकर्ता अमर सिंह मेहता को श्रद्धांजलि अर्पित कर की। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक की घटनाओं ने 7.5 करोड़ युवाओं को प्रभावित किया है। छात्रों ने पेपर लीक की घटनाओं को लेकर अपनी पीड़ा बताई। एक छात्रा ने बताया कि वर्ष 2020 में परीक्षा दी थी, लेकिन उसके बाद पेपर लीक होने की जानकारी मिली, जिससे उसका मनोबल टूट गया। दूसरी छात्रा ने बताया कि वर्ष 2025 में पटवारी भर्ती की परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक होने से उसे दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। एक अन्य छात्र ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बावजूद सरकार पेपर लीक रोकने में विफल रही है, जबकि निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सरकारी संस्थानों में अवसर सीमित हैं।

‘पेपर लीक युवाओं के सपनों पर हमला’
छात्रों की बातें सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि आज युवाओं के सामने दो रास्ते खड़े कर दिए गए हैं। पहला रास्ता मेहनत का और दूसरा पेपर लीक व भ्रष्टाचार का है। उन्होंने कहा कि जिनके पास धन और प्रभाव है, उनके लिए गलत तरीके अपनाने के रास्ते खुले हैं, जबकि ईमानदारी से मेहनत करने वाले युवाओं का भविष्य दांव पर लग रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक केवल परीक्षा में गड़बड़ी नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों और विश्वास पर सीधा हमला है।
‘पहाड़ी राज्यों का युवा कभी संघर्षों से पीछे नहीं हटता’
कार्यक्रम के दौरान देहरादून की छात्रा रिया थापा को भी याद किया गया। स्क्रीन पर रिया की तस्वीर प्रदर्शित की गई और राहुल गांधी ने उसके पिता राजेश थापा को मंच पर आमंत्रित किया। भावुक माहौल में राजेश थापा ने बताया कि उनकी बेटी देर रात तक पढ़ाई करती थी और पेपर लीक की खबर मिलने के बाद गहरे सदमे में चली गई थी और आत्महत्या कर ली थी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहाड़ी राज्यों का युवा संघर्षों से कभी पीछे नहीं हटता, लेकिन जब उसकी मेहनत और सपनों के साथ अन्याय होता है, तो वह आवाज बुलंद करता है।

‘बच्चों की पढ़ाई के लिए लोग लेते हैं कर्ज’
राहुल गांधी ने कहा कि ये युवा सिर्फ अपनी मेहनत का सम्मान और अपने भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले करोड़ों युवा वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। पूरा परिवार उनकी पढ़ाई के लिए आर्थिक व मानसिक संघर्ष करता है। कई परिवार कर्ज लेकर बच्चों को शिक्षा दिलाते हैं, लेकिन बढ़ती महंगी शिक्षा और सीमित अवसरों के कारण हर परिवार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा उपलब्ध नहीं करा पाता। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम शुक्रवार को मौसम खराब होने के कारण देर से शुरू हुआ था।






