योगेंद्र मलिक
देहरादून, 3 जून 2026ः
अगले साल 2027 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड आ रहे हैं। वे कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे और नेताओं को चुनावी तैयारी के टिप्स देंगे।
राहुल गांधी चार और पांच जून को उत्तराखंड में रहेंगे। वे अल्मोड़ा, पौड़ी और देहरादून में कार्यकर्ताओं में जोश भरने के साथ ही जीत का गुरु मंत्र देंगे। साथ ही इस बार भाजपा की हैट्रिक की कोशिश को रोकना भी उनके लिए एक चुनौती होगी। भाजपा ने मई के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति से मैदानी इलाकों देहरादून और हरिद्वार पर प्रभुत्व जमाने की कोशिश की थी, जबकि राहुल गांधी का फोकस पर्वतीय गढ़वाल-कुमाऊं और दून घाटी पर रहेगा। कांग्रेस के लिए 2027 विधानसभा चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी 2017 व 2022 के चुनावों में लगातार हार का सामना कर चुकी है।
कांग्रेस ने नवंबर 2025 में ही प्रदेश के नेतृत्व में बदलाव करते हुए गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और हरक सिंह को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी थीं, ताकि चुनावी तैयारी समय रहते मजबूत की जा सके। पार्टी का यह कदम उसके इरादों की गंभीरता को दर्शाता है। राहुल गांधी के दौरे का मकसद न सिर्फ क्षेत्रीय समर्थन जुटाना है, बल्कि जनता के बीच भाजपा शासन के खिलाफ आक्रोश, महंगाई, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था की गिरावट को भी उजागर करना है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि राहुल गांधी के आगमन से जनता में उत्साह है। उन्होंने कहा कि आमजन भाजपा शासन से दुखी है। कहा कि राहुल गांधी विशेष रूप से पूर्व सैनिकों से संवाद पर जोर देंगे, ताकि फौजी बहुल प्रदेश में कांग्रेस की पकड़ मजबूत की जा सके। इसके अलावा वह बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों के प्रबंधन व श्रद्धालुओं के दान के दुरुपयोग के आरोपों को भी उठाएंगे। गोदियाल ने कहा कि बीकेटीसी श्रद्धालुओं के दान का गलत इस्तेमाल हो रहा है। यही मुद्दे पहाड़ के मतदाताओं तक पहुंचाए जाएंगे।
राहुल गांधी के दौरे के दौरान कुछ विपक्षी नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की भी खबरें हैं। दूसरी तरफ भाजपा नेतृत्व ने इस घमासान के मद्देनजर संगठन में फेरबदल किया है। पार्टी ने प्रदेश के विवादित चेहरों को अन्य राज्यों की जिम्मेदारी देकर चर्चा से बाहर करने का निर्णय लिया है। संगठन महामंत्री अजेय कुमार को राजस्थान की जिम्मेदारी सौंपा जाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अजेय कुमार बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।






