Ayodhya

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर महंत धर्मदास बोले- सुप्रीम कोर्ट कराए जांच, आरोपी कर्मचारी टिन्नू ने दी ये सफाई

हनुमानगढ़ी के महंत ने ट्रस्ट और केंद्र सरकार पर उठाए सवाल, कहा- पूरे विश्व में हो रही बदनामी, ट्रस्ट का कर्मचारी बोला- 50 करोड़ की बताई जा रही जमीन 2008 में खरीदी थी, ऑटो चलाकर कमाया पैसा

अनिल निषाद

अयोध्या, 17 जून 2026:

रामनगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामले की जांच जारी है लेकिन इस बीच हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला बोलते हुए पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट से कराने की मांग की है। वहीं आरोपों के घेरे में आए राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने पहली बार कैमरे के सामने आकर अपना पक्ष रखा है।

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महंत धर्मदास ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ था, इसलिए अब इस मामले का संज्ञान भी सुप्रीम कोर्ट को ही लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि न्यास के समय से ही चंदा और धन संग्रह का सिलसिला चल रहा है। ट्रस्ट बनने के बाद भी वही प्रक्रिया जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि के नाम पर लोग कमाई कर रहे हैं।

धर्मदास ने कहा कि जांच तो चल रही है लेकिन इससे कोई ठोस परिणाम निकलने की उम्मीद नहीं दिख रही। उन्होंने केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार ने ट्रस्ट का गठन किया है तो उसे भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं। जो लोग पैसा लूट रहे हैं, उनका नाश होना तय है। अब इस मामले को रामलला ही देखेंगे।

महंत ने यह भी कहा कि घोटाला हुआ हो या नहीं लेकिन इस विवाद के कारण पूरे विश्व में राम मंदिर ट्रस्ट की छवि को नुकसान पहुंचा है और उसकी बदनामी हो रही है।

उधर, चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों से घिरे कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी। उसने कहा कि वह वर्ष 1993 से विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा है। जिस जमीन की कीमत 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है, उसे वर्ष 2008 में खरीदा था। उस पर मकान का निर्माण 2015-16 में कराया गया था। टिन्नू ने दावा किया कि यह सब सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मंदिर निर्माण प्रक्रिया शुरू होने से पहले का है।

टिन्नू ने कहा कि उसने ऑटो चलाकर मेहनत से कमाई की है। मंदिर ट्रस्ट में उसकी जिम्मेदारी केवल सेवा कार्यों तक सीमित थी, जिसमें साफ-सफाई, पानी और अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख शामिल थी। उसने नोटों की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर कहा कि उसका उस विभाग से कोई संबंध नहीं था, इसलिए वह उस बारे में जानकारी नहीं दे सकता।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर उठ रहे सवालों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की निगाहें जांच के नतीजों और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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