Uttarakhand

पेड़ कटान के विरोध में उतरे पर्यावरणविद्, बोले- वन्यजीवों का घर छिना तो बढ़ेगा संघर्ष

ऋषिकेश के सात मोड़ मार्ग को चौड़ा करने का विरोध, पर्यावरणविदों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आंदोलन तेज करने का किया ऐलान, बोले- वन्यजीवों के आने-जाने के पारंपरिक रास्ते खत्म होने से आबादी वाले क्षेत्रों को खतरा

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 14 अगस्त 2026ः

ऋषिकेश के सात मोड़ क्षेत्र में सड़क चौड़ी करने के लिए पेड़ कटान के विरोध में पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में वक्ताओं ने सड़क परियोजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सात मोड़ क्षेत्र हाथियों के महत्वपूर्ण आवागमन क्षेत्र में आता है। यहां बड़े पैमाने पर पेड़ कटान और लंबे समय तक निर्माण गतिविधियां चलीं तो हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास और आवागमन प्रभावित होगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा है।

पर्यावरणविद् हिमांशु अरोड़ा ने कहा कि विकास के नाम पर लगातार वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर ऋषिकेश के सात मोड़ मार्ग को फोरलेन या सिक्सलेन करने की योजना है और दूसरी ओर थानों क्षेत्र में भी सड़क चौड़ी हो रही है। उन्होंने इसे हाथियों के आवास को चारों तरफ से कंक्रीट के दबाव में लाने वाला कदम बताया। यदि वन्यजीवों के रहने और आने-जाने के पारंपरिक रास्ते खत्म होंगे तो हाथी मजबूर होकर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर सकते हैं।

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सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उत्तराखंड गठन के बाद प्रदेश में हुए वन कटान में देहरादून जिले की हिस्सेदारी करीब 47 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में जिस तेजी से जंगल और पेड़ प्रभावित हुए हैं, वह भविष्य के लिए गंभीर संकेत है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो देहरादून का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से खत्म होगा और शहर कंक्रीट के विस्तार में बदल जाएगा। उन्होंने मौजूदा विकास मॉडल को पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताया।

पर्यावरण कार्यकर्ता शैफी ने कहा कि सात मोड़ मार्ग पर सड़क निर्माण शुरू होने पर चार-पांच वर्षों तक चलने वाली निर्माण गतिविधियों से वन्यजीवों का प्राकृतिक व्यवहार और आवास प्रभावित हो सकता है। शिल्पी ने एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेपाली फार्म से देहरादून जाने वाला फोरलेन मार्ग पहले से मौजूद है। ऐसे में उसके समानांतर सात मोड़ क्षेत्र में दूसरे मार्ग की जरूरत और उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का जवाब संबंधित एजेंसियों को देना चाहिए।

नितिन ने सात मोड़ की सड़क को सीधा करने से दुर्घटनाएं कम होने के दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सड़क की चौड़ाई बढ़ना अपने आप में सड़क सुरक्षा की गारंटी नहीं है। चौड़ी सड़कों पर वाहनों की गति बढ़ने से हादसों की गंभीरता बढ़ सकती है। उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए गति नियंत्रण और वैज्ञानिक यातायात प्रबंधन जैसे उपायों पर जोर देने की मांग की। वक्ताओं ने सरकार से सात मोड़ क्षेत्र में प्रस्तावित पेड़ कटान और सड़क चौड़ीकरण की योजना पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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