
लखनऊ, 10 सितंबर 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजधानी लखनऊ में सियासी टकराव भी सड़क पर उतरता दिख रहा है। बुधवार को भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का पुतला फूंके जाने के बाद गुरुवार को समाजवादी पार्टी ने इसका जवाब देने की कोशिश की। बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला लेकर हजरतगंज चौराहे पर पहुंच गए और भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सपा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की भनक पहले ही पुलिस को लग गई थी। लिहाजा हजरतगंज चौराहे और आसपास के इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। जैसे ही कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने की कोशिश की वैसे पुलिस ने उन्हें रोक लिया। पुतला छीनने को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक नोकझोंक चलती रही। कार्यकर्ता पुतला फूंकने पर अड़े रहे, जबकि पुलिस उन्हें मौके से हटाने में जुटी रही।
पुतला फूंकने से पहले ही पुलिस ने कसा शिकंजा
स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाकर बसों में बैठाया और उन्हें इको गार्डन भेज दिया। इस दौरान हजरतगंज चौराहे पर काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा।
सपा कार्यकर्ताओं का आरोप था कि भाजपा ने बुधवार को अखिलेश यादव का पुतला फूंककर राजनीतिक माहौल खराब करने की कोशिश की। इसके विरोध में वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुतला फूंकने पहुंचे थे। हालांकि पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी और कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।

दरअसल, भाजपा के प्रदर्शन के जवाब में सपा ने गुरुवार को हजरतगंज में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। सपा कार्यकर्ताओं के पहुंचने से पहले ही पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी थी। चुनाव से पहले राजधानी में पुतले की सियासत ने दोनों प्रमुख दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी को सड़क पर ला दिया है।





