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तेल की आग में झुलसा शेयर बाजार… सेंसेक्स व निफ्टी दोनों फिसले, निवेशकों के 7 लाख करोड़ डूबे

मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से निवेशकों में घबराहट बढ़ी, अमेरिका की महंगाई के आंकड़ों ने भी वैश्विक बाजारों पर दबाव बनाया, रुपया भी कमजोर पड़ा और शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 35 पैसे फिसला

बिजनेस डेस्क, 11 जून 2026:

गुरुवार को शेयर बाजार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 400 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,150 के स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा रहा कि आईटी, बैंकिंग और ऑटो समेत ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

कारोबार के शुरुआती घंटों में एचसीएल टेक और एशियन पेंट्स के शेयरों में करीब दो-दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं रुपये पर भी दबाव दिखाई दिया और भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 35 पैसे कमजोर होकर 95.60 के स्तर पर पहुंच गई।

बाजार पर सबसे बड़ा असर मध्य पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का पड़ा है। अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए ताजा सैन्य हमलों के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। साथ ही दुनिया के अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर संकट गहराने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। तेल महंगा होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार में भी साफ दिखा।

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़े सामने आने के बाद वहां के शेयर बाजारों में बिकवाली बढ़ी। इसके बाद एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला।

जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एमएससीआई सूचकांक करीब 0.9 फीसदी गिर गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 3 फीसदी टूट गया। जापान के निक्केई 225 फ्यूचर्स और टॉपिक्स में 1.2 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 इंडेक्स 0.4 फीसदी नीचे रहा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 0.1 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.2 फीसदी फिसल गया।

यूरोपीय बाजारों का रुख भी कमजोर रहा। यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में 0.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी 0.3 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में हालात सामान्य नहीं होते और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और दबाव बना रह सकता है।

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