लखनऊ, 10 जून 2026:
अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार अब जांच तंत्र को और अधिक तकनीकी एवं वैज्ञानिक बनाने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में बुधवार को 48 प्रशिक्षु अधिकारियों ने भ्रमण कर आधुनिक फॉरेंसिक एवं साइबर जांच तकनीकों की जानकारी हासिल की।
स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, राज्य कर विभाग तथा कोषागार विभाग के ये अधिकारी डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में प्रान्तीय सिविल सेवा के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं। संस्थान के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान तथा आधुनिक जांच प्रणालियों से अवगत कराया।
परिभ्रमण के दौरान अधिकारियों ने ड्रोन तकनीक, डीएनए लैब और अन्य अत्याधुनिक फॉरेंसिक सुविधाओं का निरीक्षण किया।
उन्हें बताया गया कि आधुनिक दौर में अपराधों के स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है और डिजिटल दुनिया में होने वाले अपराधों की जांच के लिए तकनीकी दक्षता बेहद आवश्यक हो गई है। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यूपीएसआईएफएस वर्तमान में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विभिन्न संस्थानों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने का कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी अपराध की जांच में साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। यही अपराधी को सजा तक पहुंचाने का आधार बनती है। डॉ. गोस्वामी ने आह्वान करते हुए कहा कि जिज्ञासा ही सीखने की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि पहले अपराध मुख्य रूप से भौतिक स्वरूप में होते थे लेकिन अब साइबर युग में अपराध के नए आयाम सामने आए हैं। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों सहित सभी संबंधित विभागों के लिए तकनीक और साइबर सुरक्षा की गहन समझ जरूरी हो गई है।
कार्यक्रम में पुलिस उपमहानिरीक्षक हेमराज मीना, उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव, चिरंजीब मुखर्जी, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी, अतुल यादव, फैकल्टी डॉ. मनीष राय, डॉ. पलक, आर शैलेन्द्र सिंह, कार्तिकेय समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।






