लखनऊ, 25 अप्रैल 2026:
प्रदेश में लगातार बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए योगी सरकार ने गो-आश्रय स्थलों में पशुओं की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी व्यवस्थाएं तत्काल प्रभाव से दुरुस्त की जाएं।
सरकार ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि गो-आश्रय स्थलों पर गर्मी से बचाव के लिए वाटर मिस्टिंग सिस्टम, कूलर, पंखे और पर्याप्त छायादार व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही पशुओं को लगातार स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की निगरानी करने और किसी भी कमी को तुरंत दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि संभावित चारा संकट से निपटने के लिए भी व्यापक रणनीति तैयार की गई है। प्रदेश में चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। खाली कराई गई जमीन पर हाइब्रिड नेपियर घास की बुआई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता बनी रहे। साथ ही गो-आश्रय स्थलों में छायादार वृक्षों का रोपण भी तेजी से किया जा रहा है।
भूसा दान अभियान को भी प्रदेशभर में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। जौनपुर के जिलाधिकारी द्वारा भूसा दान करने वालों को ‘पुण्य की एफडी’ प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। वहीं आजमगढ़, बागपत, सहारनपुर और हरदोई में वाटर मिस्टिंग सिस्टम, फॉगर, कूलर और पंखों की विशेष व्यवस्था की गई है।
महराजगंज, जौनपुर, बलिया, वाराणसी, एटा, सहारनपुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, चित्रकूट और गोरखपुर समेत कई जनपद इस अभियान में अग्रणी बनकर उभरे हैं। यहां जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के सहयोग से गो-आश्रयों में पर्याप्त मात्रा में भूसा पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने अन्य जिलों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है जिससे भीषण गर्मी के इस दौर में एक भी पशु को परेशानी न हो।
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