
न्यूज डेस्क, 16 जुलाई 2026:
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। गुरुवार तड़के अमेरिका ने ईरान में एक बार फिर बड़े हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट, रक्षा प्रतिष्ठानों और सिस्तान-बलूचिस्तान में एक ब्रिगेड की बैरक को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। हमलों के बाद बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी किया गया जबकि जॉर्डन ने आठ ईरानी मिसाइलों को मार गिराने की जानकारी दी।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका पीछे नहीं हटता तो ईरान बड़े सैन्य टकराव के लिए तैयार है। वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर मध्य पूर्व से तेल और गैस का निर्यात भी रोका जा सकता है।

इस बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने होर्मुज रूट पर भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने के निर्देश दिए हैं। ईरानी सैन्य मुख्यालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोल्फाघरी ने धमकी दी कि यदि अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला किया तो ईरान पूरे मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाएगा।
अमेरिका ने उत्तरी ईरान के सेमनान शहर पर एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हमला किया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार सेमनान नागरिक हवाई अड्डे की मुख्य इमारत और एक भंडारण सुविधा को निशाना बनाया गया। एयरपोर्ट को मामूली नुकसान की बात कही गई है लेकिन भंडारण सुविधा में क्या रखा था और किसी के हताहत होने की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने यह भी दावा किया कि उसने ईरान के बंदरगाह की ओर जा रहे कुराकाओ-ध्वज वाले एक टैंकर को मिसाइल दागकर रोक दिया। सेंटकॉम के मुताबिक जहाज ने कई चेतावनियों के बावजूद रास्ता नहीं बदला जिसके बाद अमेरिकी विमान ने उसकी स्मोकस्टैक पर हमला कर उसे निष्क्रिय किया।
उधर, ईरानी सेना ने ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ के दसवें चरण में कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों का दावा किया है। ईरान के अनुसार कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस पर रडार, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और ईंधन डिपो को निशाना बनाया गया। लगातार बढ़ते हमलों ने होर्मुज स्ट्रेट और पूरे खाड़ी क्षेत्र में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।






