
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 29 जुलाई 2026ः
उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत व बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बुधवार को उत्तराखंड सब एरिया में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इस दौरान मानसून सहित विभिन्न आपदा परिस्थितियों में संयुक्त कार्ययोजना, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और आपसी समन्वय को और मजबूत बनाने पर चर्चा की गई।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में भारतीय सेना हमेशा भरोसेमंद सहयोगी रही है। जब भी राज्य में बड़ी आपदा आई है, सेना ने राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्ष 2024 की केदारघाटी आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद सेना और वायु सेना ने हजारों तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। वहीं, वर्ष 2025 में धराली समेत अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी सेना ने प्रभावित लोगों की सुरक्षित निकासी में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार और यूएसडीएमए सेना के साथ समन्वय को और मजबूत बनाने के लिए हर संभव सहयोग देंगे। उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) ब्रिगेडियर आरएस थापा ने कहा कि आपदा के समय भारतीय सेना का पहला लक्ष्य मानव जीवन की रक्षा करना होता है। सेना किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए हमेशा तैयार रहती है और विशेष रूप से ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने पर जोर देती है, क्योंकि शुरुआती घंटों में की गई त्वरित कार्रवाई से अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती है।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि सेना के पास उपलब्ध राहत एवं बचाव संसाधनों का विवरण इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क (आईडीआरएन) पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर विभिन्न एजेंसियां उनका शीघ्र उपयोग कर सकें। इसके अलावा जिलों में गठित क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) में सेना की सहभागिता बढ़ाने और पूर्व सैनिकों के अनुभव एवं विशेषज्ञता का उपयोग राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी। बैठक में यूएसडीएमए के एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा सहित प्राधिकरण के विशेषज्ञ व सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।






