Uttarakhand

उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों के विस्फोट से बाढ़ का खतरा, धामी सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन की रिपोर्ट का किया विमोचन, ढाई साल में अब तक केवल चार झीलों का हुआ सर्वे, नौ का अभी बाकी, आपदाओं से निपटने की तैयारियों की गति धीमी

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 5 सितंबर 2026ः

जलवायु परिवर्तन और तेजी से बदलते हिमालयी पर्यावरण के बीच उत्तराखंड में ग्लेशियरों, ग्लेशियर झीलों और हिमस्खलन का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद संभावित आपदाओं से निपटने के लिए निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने की गति धीमी बनी हुई है। इससे बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन की तैयार की गई रिपोर्ट में चिंता जताई गई है। शनिवार को मीडिया से बातचीत में सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल और प्रवीण उप्रेती ने रिपोर्ट का संयुक्त रूप से विमोचन किया।

सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फाउंडेशन की रिपोर्ट ‘उत्तराखंड ऐट अ क्लाइमेट क्रॉसरोड्स-वॉट फोर इयर्स ऑफ डिजास्टर रिपोर्टिंग टेल अस अबाउट ग्लेशियर्स, ग्लोफ एंड एवलांचेस’ में इस स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने ग्लेशियरों से बनने वाली 13 झीलों को चिह्नित किया है, लेकिन करीब ढाई साल में अब तक केवल चार झीलों का ही सर्वे हो सका है। ऐसे में बाकी नौ झीलों का सर्वे कब पूरा होगा, यह स्पष्ट नहीं है।

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उन्होंने कहा कि ग्लेशियर झीलों के आसपास प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करने का काम भी अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है। सरकार को इस दिशा में तेजी लाने की आवश्यकता है। क्योंकि किसी संभावित ग्लेशियर झील विस्फोट बाढ़ की स्थिति में समय रहते चेतावनी मिलना जान-माल के नुकसान को कम करने में अहम साबित हो सकता है। नौटियाल के मुताबिक वाडिया संस्थान ने अलकनंदा बेसिन में 219 हैंगिंग ग्लेशियरों की पहचान की है। इनमें करीब 30 प्रतिशत बद्रीनाथ और माणा के आसपास ऊपरी अलकनंदा क्षेत्र में स्थित हैं। संस्थान ने एक हजार से अधिक ग्लेशियरों और 426 ग्लेशियर झीलों का भी उल्लेख किया है। इनमें से 25 झीलों को वैज्ञानिकों ने खतरनाक श्रेणी में रखा है।

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उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वर्ष 2024 में उत्तराखंड में 13 संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियर झीलों की पहचान की थी। इनमें पांच को उच्चतम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया था। इसके बावजूद इन क्षेत्रों में निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है। रिपोर्ट में वसुधारा झील का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि वहां जोखिम का आकलन पूरा होने के बावजूद कई महीनों बाद तक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित नहीं किए जाने की सूचना सामने आई।

नौटियाल ने केंद्र और राज्य सरकार से ग्लेशियर झीलों और हिमालयी आपदाओं के जोखिम को देखते हुए तत्काल कदम उठाने के साथ-साथ दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संस्था ने पिछले चार वर्षों में उत्तराखंड में हुई आपदाओं और दुर्घटनाओं का दस्तावेजीकरण करते हुए उनके कारणों और प्रभावों को समझने का प्रयास किया है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नेपाल में हालिया आपदा में हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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