
लखनऊ, 26 अगस्त 2026:
यूपी में बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करने या उनका भरण-पोषण नहीं करने वाली संतान और आश्रित रिश्तेदारों के खिलाफ अब कार्रवाई का रास्ता और आसान होगा। योगी सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने नियम 22 में 22क, 22ख और 22ग जोड़ने का निर्णय लिया है।
बुजुर्गों के सम्मान व अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों में संशोधन
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत यदि कोई संतान या आश्रित रिश्तेदार अपने बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण नहीं करता अथवा उनके साथ दुर्व्यवहार करता है तो वरिष्ठ नागरिक अपनी संपत्ति से उन्हें बेदखल कर सकेंगे। यानी माता-पिता की देखभाल और सम्मान से मुंह मोड़ना अब संतान के लिए संपत्ति के अधिकार के लिहाज से भी भारी पड़ सकता है।
30 दिन में होगी शिकायत की सुनवाई
सरकार ने इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए बेदखली की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध किया है। ऐसे मामलों में वरिष्ठ नागरिक जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत कर सकेंगे। शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के भीतर किए जाने का प्रावधान किया गया है, जिससे बुजुर्गों को न्याय के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। जिला मजिस्ट्रेट को इस प्रकार के मामलों की मासिक रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी। इससे शिकायतों की निगरानी के साथ-साथ व्यवस्था के क्रियान्वयन पर भी नजर रखी जा सकेगी।
जल्द जारी होगा टोल नंबर
सरकार बुजुर्गों की परेशानी को देखते हुए जल्द ही एक टोल नंबर भी जारी करेगी। इसका मकसद ऐसे वरिष्ठ नागरिकों तक मदद पहुंचाना है, जो शारीरिक या अन्य कारणों से खुद संबंधित कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज नहीं करा सकते।
सरकार का मानना है कि इस संशोधन से वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा और सम्मान का भरोसा मिलेगा। साथ ही, यह परिवारों को अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल और उनके अधिकारों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने में मदद करेगा।






