Uttar Pradesh

बौद्ध पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान : वाराणसी में भूटान सरकार बनाएगी बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस

यूपी-भूटान के बीच हुआ एमओयू, 30 वर्ष की लीज पर एक रुपये वार्षिक किराये में दी गई दो एकड़ भूमि, भारत-भूटान के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती

लखनऊ, 10 जून 2026:

भारत और भूटान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में यूपी सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। बुधवार को उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत वाराणसी में भूटान सरकार द्वारा बौद्ध मंदिर और गेस्ट हाउस का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना न केवल बौद्ध पर्यटन को नई गति देगी, बल्कि दोनों देशों के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी और मजबूत बनाएगी।

समझौते के अनुसार वाराणसी की तहसील पिंडरा के परगना कोलअसला स्थित अजईपुर क्षेत्र में बौद्ध मंदिर एवं अतिथि गृह के निर्माण के लिए लगभग दो एकड़ भूमि भूटान सरकार को उपलब्ध कराई जाएगी। भूमि संबंधी डीड पर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के विशेष सचिव मृदुल चौधरी और भूटान सरकार की प्रतिनिधि एवं उप प्रमुख मिशन सुश्री ताशी पेल्डेन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर भूटान सरकार की मंत्री-परामर्शदाता (वित्त) चिमी वांगमो तथा सेंट्रल मोनास्टिक बॉडी ऑफ भूटान के भारत-भूटान मठवासी मामलों के संयुक्त सचिव उगेन नामग्याल भी उपस्थित रहे।

Varanasi Buddhist Tourism New Temple and Guest House (1)

यूपी के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस समझौते को दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने वाली बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने यह भूमि 30 वर्ष की लीज पर मात्र एक रुपये वार्षिक किराये की प्रतीकात्मक दर पर उपलब्ध कराई है। उनका विश्वास है कि भविष्य में यह परिसर बौद्ध श्रद्धालुओं, भिक्षुओं और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित होगा।

जयवीर सिंह ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बौद्ध पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास, संकिसा, सारनाथ और कुशीनगर सहित प्रमुख बौद्ध स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से प्रदेश में बौद्ध पर्यटन को नई दिशा मिली है। इससे देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकार की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य बौद्ध पर्यटन को नई गति देना तथा भूटान के साथ सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस पहल से वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ेगी और भारत-भूटान के आध्यात्मिक रिश्तों को नई ऊर्जा मिलेगी।

समझौता हस्ताक्षर समारोह के दौरान अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात, महानिदेशक पर्यटन डॉ. वेदपति मिश्रा, निदेशक पर्यटन (इको टूरिज्म) पुष्प कुमार सहित पर्यटन विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।

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