Uttar Pradesh

अब हर पेड़ की होगी डिजिटल पहचान… जानिए किसने शुरू की वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था

यूपी में समाज कल्याण विभाग के विद्यालयों, छात्रावासों और आश्रम पद्धति संस्थानों में पेड़ों को मिलेगा यूनिक आईडी नंबर, फोटो और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए होगी निगरानी, बिना अनुमति नहीं होगी कटाई या बड़ी छंटाई

लखनऊ, 15 जून 2026:

यूपी में पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती देने की दिशा में समाज कल्याण विभाग ने एक अनूठी और दूरदर्शी पहल शुरू की है। अब विभाग के सभी जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों, आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों और अन्य संस्थानों में मौजूद हर पेड़ की अलग पहचान होगी। विभाग ने ‘वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था’ लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत हर पेड़ को एक यूनिक पहचान संख्या (यूनीक आईडी) प्रदान की जाएगी।

इससे पेड़ों की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बन सकेगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत विभागीय संस्थानों में स्थित सभी पेड़ों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाएगा। हर पेड़ की प्रजाति, स्थान, अनुमानित आयु और वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण तैयार कर वृक्ष परिसंपत्ति पंजिका में दर्ज किया जाएगा।

इसके साथ ही हर पेड़ की फोटो लेकर उसका डिजिटल रिकॉर्ड भी बनाया जाएगा। इससे समय-समय पर उसकी स्थिति का आकलन करना और आवश्यक संरक्षण उपाय सुनिश्चित करना आसान होगा। समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब संस्थानों में मौजूद सभी पेड़ों को विभागीय परिसंपत्ति के रूप में दर्ज किया जाएगा। किसी भी पेड़ की कटाई अथवा बड़े स्तर पर छंटाई बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नहीं की जा सकेगी।

इसके साथ ही हर सार पेड़ों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा जिससे उनकी सुरक्षा और संरक्षण की स्थिति की नियमित समीक्षा हो सके। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि पेड़ हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं। उनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। यह पहल उसी सोच का विस्तार है।

उन्होंने कहा कि वृक्ष परिसंपत्ति प्रबंधन व्यवस्था से पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ विद्यार्थियों और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। समाज कल्याण विभाग का लक्ष्य अपने विद्यालयों, छात्रावासों और अन्य संस्थानों को शिक्षा एवं सामाजिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के आदर्श केंद्र के रूप में विकसित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल प्रदेश की हरित धरोहर को संरक्षित रखने और सतत विकास के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

READ MORE

ये भी पढ़ें  एटा कलेक्‍ट्रेट: 17 रिटायर्ड कर्मियों की पेंशन रुकी, 30 सालों तक फर्जी नौकरी करने का मामला

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
Secret Link