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Mango Festival में 800 किस्मों ने जीता दिल, समापन में लगा खुशबू व जायके पर पहरा, लोगों का हंगामा

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय आम महोत्सव का समापन, उत्पादक व प्रतिभागी सम्मानित, लोगों ने आम की दुर्लभ किस्मों और Mango Products की खरीदारी की, पिछले साल आखिरी दिन मची अफरातफरी को रोकने के लिए इस बार गेट पर लगा रहा सख्त पहरा, आम चखने की उम्मीद से आये लोग हंगामा कर मायूस लौटे

लखनऊ, 5 जुलाई 2026:

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे ‘आम महोत्सव’ का का खुशनुमा समापन हो गया। सैकड़ों लोगों ने आम की तमाम किस्मों को निहारा व खरीदारी भी की। किस्मों के नाम उनकी कीमत व खासियत से लोग अचरज में दिखे। हालांकि बीते साल की तरह प्रदर्शित आमों का जायका लेने की उम्मीद लेकर पहुंचे लोगों को मायूस होना पड़ा। समापन की घोषणा कर लोगों की एंट्री नहीं दी गई। इससे वहां हंगामे की स्थिति बनी रही।

बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने गत 3 जुलाई को आम महोत्सव का शुभारंभ किया था। समारोह में आम उत्पादकों द्वारा प्रदर्शित आम की 800 किस्मों के स्टॉल लगाये गए। वहीं मैंगो उत्पाद (Mango Products): स्टॉलों पर केवल ताज़ा आम ही नहीं, बल्कि आम से बनी मिठाइयां, अचार, पापड़, और आम पाउडर जैसे उत्पाद भी बिक्री और प्रदर्शन के लिए उपलब्ध रहे।
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आज आखिरी दिन राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह व भाजपा एमएलसी पवन चौहान आदि ने स्टालों का निरीक्षण किया। राज्यमंत्री ने आम की विभिन्न प्रजातियों के विजेताओं,आम के संरक्षित उत्पादन के विजेताओं, आम पकवान के विजेताओं सहित आम खाओ प्रतियोगिता एवं क्विज प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया।
उद्यान विभाग ने सभी मेहमानों की आवभगत की।
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इस दौरान भारी संख्या में लोग परिवार के साथ महोत्सव में दिखाई दिए। सभी यही कह रहे थे कि इससे पहले आम की इतनी किस्मों के नाम तक नहीं सुने थे। सबने स्टालों पर अपने बजट के मुताबिक खरीदारी भी की। लोगों ने आम से बने उत्पादों को भी खरीदा।
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बीते साल आम महोत्सव के समापन के दिन वहां आये लोगों को प्रदर्शित आमों को ले जाने के इजाजत दे दी गई थी। इस दौरान लोगों में अपनी पसंद के आम लेने की होड़ लग गई थी। अफरातफरी के हालात बन गए। इस दफा इन हालातों से बचने के लिए गेट पहले से बंद कर दिए गए। सुरक्षाकर्मियों ने उनकी एंट्री रोक दी। इस दौरान हंगामा होता रहा। लोग रेलिंग पर उछलकूद करते रहे और अंदर जाने की जिद करते रहे। आखिरकार उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।

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