देहरादून, 25 जुलाई 2026:
लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों की पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत बनाने के लिए देहरादून में शुक्रवार को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से आयोजित इस International Conference का विषय था मॉडल स्टैंडर्ड्स फॉर इलेक्टोरल ऑब्जर्वर। सम्मेलन में भारत के साथ अमेरिका, रोमानिया, आयरलैंड, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, हंगरी और नेपाल के चुनाव प्रबंधन संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 20 से अधिक विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों समेत 400 से ज्यादा प्रतिभागी जुड़े।
चुनाव पर भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि सम्मेलन का मकसद दुनियाभर के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और चुनाव प्रबंधन संस्थानों को एक मंच पर लाकर बेहतर चुनाव प्रणाली पर विचार साझा करना है। उन्होंने कहा कि Election Observer की जिम्मेदारी पूरी चुनाव प्रक्रिया पर निष्पक्ष निगरानी रखना है, ताकि पारदर्शिता बढ़े और लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कायम रहे।
निष्पक्ष प्रेक्षक से मजबूत होती है चुनाव प्रक्रिया
भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भारती ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि चुनाव प्रेक्षकों की सक्रिय और निष्पक्ष मौजूदगी से पूरी Election Machinery ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनती है। उनका कहना था कि किसी भी हाल में जनता का चुनाव प्रक्रिया पर विश्वास बना रहना चाहिए और यही हर प्रेक्षक का सबसे अहम दायित्व है।
उद्घाटन सत्र में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. तवस्सुम नकवी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने निर्वाचन आयोग की ओर से आधुनिक Training Module तैयार करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
Digital Campaign और Election Spending पर भी चर्चा
सम्मेलन के दूसरे सत्र में सीजीएसटी देहरादून के अपर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता ने Expenditure Observer की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब चुनाव प्रचार तेजी से Digital और Social Media प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में इन माध्यमों पर खर्च और प्रचार की प्रभावी निगरानी के लिए नई व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
AI से चुनाव प्रबंधन को मिल सकती है नई दिशा
स्टेट पुलिस ट्रेनिंग के नोडल आईजी अनंत शंकर ताकवले ने पुलिस प्रेक्षक की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि Artificial Intelligence की मदद से भविष्य में चुनाव प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा सकता है। नई तकनीकें कई संभावित चुनौतियों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

अलग-अलग देशों के अनुभव हुए साझा
विशेष परिचर्चा सत्र में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने विभिन्न देशों की चुनाव प्रणाली में Election Observer की भूमिका पर प्रकाश डाला। हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने में फील्ड मशीनरी की जिम्मेदारियों पर चर्चा की। इस सत्र का संचालन ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की डॉ. तहा सिद्धकी ने किया।
विशेषज्ञों ने पेश किए शोध और सुझाव
सम्मेलन के तीसरे सत्र में IIIDEM की डॉ. कृतिका माथुर, आईआईएम काशीपुर के प्रो. दिलीप कुमार, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के प्रो. राधे श्याम झा, दून यूनिवर्सिटी के प्रो. हर्ष डोभाल और ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी की प्रो. डेजी एलेक्जेंडर ने अपने शोध और सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हिमानी बिंजोला ने किया।
कार्यक्रम में संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविद, रिसर्च स्कॉलर्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहे।






