लखनऊ, 1 अगस्त 2026:
यूपी में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद व्यवस्था ने पिछले नौ वर्षों में किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश सरकार ने खरीद प्रक्रिया को तकनीक आधारित, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर उपलब्ध कराया। इसका परिणाम यह रहा कि रबी विपणन वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक प्रदेश के करीब 51,70,117 किसानों से 244.26 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। इसके बदले 45,935.46 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित किए गए।
खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार कई वर्षों में प्रदेश ने निर्धारित खरीद लक्ष्य को भी पार कर नया रिकॉर्ड बनाया। रबी विपणन वर्ष 2018-19 में 50 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 52.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई, जो लक्ष्य का 105.84 प्रतिशत रही। इस दौरान 11.27 लाख से अधिक किसानों को 9,231.99 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके खातों में किया गया।
इसी तरह वर्ष 2021-22 में 56.41 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर 13.01 लाख से अधिक किसानों को 11,141.19 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। समयबद्ध भुगतान व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी उपज का मूल्य बिना किसी देरी के सीधे बैंक खातों में मिला, जिससे उनकी आर्थिक जरूरतें समय पर पूरी हुईं और अगली फसल के लिए निवेश करना भी आसान हो गया।
सरकार ने खरीद व्यवस्था को किसानों के दरवाजे तक पहुंचाने के लिए पूरे प्रदेश में 5,847 गेहूं क्रय केंद्र स्थापित किए। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ी और बिचौलियों पर निर्भरता भी काफी हद तक कम हुई। ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल सत्यापन और डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी व्यवस्थाओं ने पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया।
प्रदेश सरकार का कहना है कि एमएसपी खरीद व्यवस्था अब फसल खरीद तक सीमित नहीं है। यह किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुकी है। डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है। भुगतान सीधे किसानों के खातों में होने से बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।
सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर पात्र किसान को एमएसपी योजना का लाभ मिले। इसके लिए अधिकारियों को खरीद केंद्रों पर निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने, किसानों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने और खरीद प्रक्रिया को लगातार अधिक प्रभावी एवं किसान केंद्रित बनाने के निर्देश दिए गए हैं।






