
गोरखपुर, 4 अगस्त 2026:
जिला अस्पताल से अगवा की गई 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले ने गोरखपुर पुलिस को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद पुलिस विभाग ने एक साथ दो बड़े फैसले लिए हैं। एक तरफ विभाग ने भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, लापरवाही समेत गंभीर आरोपों में घिरे 45 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार को आर्थिक और सामाजिक सहारा देने के लिए जिले के करीब 4700 पुलिसकर्मियों ने अपने एक दिन का वेतन देने का निर्णय लिया है।
45 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, विभागीय जांच भी तेज
एसएसपी डॉ. कौस्तुभ के निर्देश पर जिन 45 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, वसूली, कर्तव्य में लापरवाही या अन्य गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं, उन्हें लाइन हाजिर किया गया है। इन सभी के खिलाफ चल रही विभागीय जांच की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है। संबंधित अधिकारियों से जांच की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है ताकि मामलों का निस्तारण तय समय में हो सके।
आरोप सही मिले तो बर्खास्तगी तक की तैयारी
एसएसपी ने साफ कहा कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन मामलों में आरोप साबित होंगे, उन पुलिसकर्मियों की सेवा समाप्त करने की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी। दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई का पूरा विवरण संबंधित पुलिसकर्मी की चरित्र पंजिका में भी दर्ज किया जाएगा।
जांच में देरी नहीं, पारदर्शिता पर जोर
पुलिस मुख्यालय ने सभी लंबित विभागीय जांचों की निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी जांच में अनावश्यक देरी न हो। हर मामले में तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर जल्द कार्रवाई की जाए ताकि पुलिस बल में अनुशासन मजबूत हो सके।
पीड़ित परिवार के साथ खड़ा हुआ महकमा
सख्त कार्रवाई के साथ पुलिस ने मानवीय पहल भी की है। एसएसपी से लेकर सिपाही तक जिले के करीब 4700 पुलिसकर्मियों ने स्वेच्छा से एक दिन का वेतन पीड़ित परिवार को देने का फैसला किया है। इस पहल से करीब 30 लाख रुपये जुटने का अनुमान है। यह राशि परिवार की जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, इलाज समेत भविष्य की आवश्यकताओं पर खर्च की जाएगी।
बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाई, परिवार की सुरक्षा भी बढ़ी
पुलिस ने परिवार के राशन और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था भी शुरू कर दी है। तीसरे नंबर की बेटी का दाखिला कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कराया गया है। दो छोटी बेटियों के निजी स्कूल में प्रवेश की प्रक्रिया भी चल रही है। एसपी सिटी निमिष पाटिल ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई किसी भी हाल में नहीं रुकने दी जाएगी। पीड़ित परिवार के घर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी व्यक्तिगत स्तर पर भी परिवार की मदद कर रहे हैं ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

यह है पूरा मामला
बता दें 28 जुलाई की रात 10 वर्षीय बच्ची जिला अस्पताल में भर्ती अपनी बड़ी बहन को खाना देने गई थी। वहीं से उसका अपहरण हो गया। पुलिस जांच के दौरान डायल-112 में तैनात गाजीपुर निवासी सिपाही अभिषेक यादव की निशानदेही पर 30 जुलाई को बच्ची का शव बरामद किया गया। बर्खास्तगी के साथ आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
वकीलों ने किया था आंदोलन
बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के आरोपी पुलिसकर्मी अभिषेक यादव के खिलाफ अधिवक्ताओं का आक्रोश सड़क पर दिखा था। सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के नेतृत्व में वकीलों ने मशाल जुलूस निकालकर मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया था।ज्ञापन में आरोपी को फांसी की सजा, पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की मांग की गई थी।






