
गोरखपुर, 29 जुलाई 2026:
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर से सीएम योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता को लेकर बड़ा संदेश दिया। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों का आह्वान किया कि वे भारत की प्रगति यात्रा में बाधा उत्पन्न करने वाली ताकतों और उनके कालनेमि जैसे रूपों को पहचानें तथा उनसे सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां भारत की तेजी से बढ़ती विकास यात्रा, सनातन संस्कृति और परंपराओं को कमजोर करने के लिए लगातार षड्यंत्र कर रही हैं। समाज ऐसे तत्वों को पहचानने में चूक गया तो यह अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव और 23 जुलाई से चल रही श्रीराम कथा के पूर्णाहुति कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा व्यासपीठ का पूजन किया। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर ही कुछ लोग ऐसी वैश्विक ताकतों के प्रवक्ता बन गए हैं जो सनातन संस्कृति पर आघात करना चाहती हैं। यदि समाज इन प्रवृत्तियों के प्रति जागरूक रहकर आत्मपरिमार्जन करेगा तो राष्ट्र की प्रगति को कोई नहीं रोक सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 वर्षों में भारत ने अभूतपूर्व विकास किया है। अगले दो-तीन वर्षों में दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि जिन देशों और शक्तियों को भारत ने विकास की दौड़ में पीछे छोड़ा है, उनके लिए यह स्वीकार करना आसान नहीं है। इसलिए देश में अस्थिरता, अशांति और अव्यवस्था फैलाने की साजिशें भी तेज हुई हैं।
नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय देश के 120 जिलों में नक्सलवाद का प्रभाव था जबकि आज एक भी जिला इससे प्रभावित नहीं है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को बढ़ावा देने वाली ताकतें अब नए और छद्म रूपों में सामने आने की कोशिश करेंगी। रामायण के कालनेमि का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय के ऐसे कालनेमियों को पहचानना और उनसे सावधान रहना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने इतिहास और धर्मग्रंथों के उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी भारत या समाज किसी बड़ी उपलब्धि की ओर बढ़ता है तब चुनौतियां भी सामने आती हैं। उन्होंने श्रीराम के वनवास, महाभारत और चंद्रगुप्त-चाणक्य के स्वर्णकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रगति के दौर में समाज को आत्ममुग्ध होने के बजाय सतर्क रहना चाहिए क्योंकि व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने वाली शक्तियां हमेशा सक्रिय रहती हैं।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन संस्कृति सभी मतों और संप्रदायों को संरक्षण देती है लेकिन कुछ विषधर इसमें घुसकर इसे डंसने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों के विरुद्ध केवल शिक्षक ही नहीं अपितु गुरु की भूमिका निभाने वाला प्रत्येक व्यक्ति समाज को जागरूक करने का दायित्व निभाए।
मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति और मातृभूमि के सम्मान को भारतीय संस्कृति का मूल बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग मातृशक्ति या मातृभूमि का अपमान करते हैं वे कठोर दंड के पात्र हैं। उन्होंने श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता तथा रावण और बालि के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा है जहां अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित हुआ।
कार्यक्रम के अंत में श्रीरामचरितमानस की आरती के साथ श्रीराम कथा का विश्राम हुआ। मुख्यमंत्री ने कथाव्यास आचार्य शांतनु जी महाराज का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, सांसद रविकिशन, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, विभिन्न पीठों के महंत, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






