
लखनऊ, 2 सितंबर 2026:
कोरोना महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर लोगों को अस्पताल पहुंचाने वाले यूपी की सरकारी एंबुलेंस सेवा के निष्कासित ड्राइवरों का गुस्सा बुधवार को राजधानी लखनऊ में फूट पड़ा। नौकरी बहाली और न्याय की मांग को लेकर 2021 में सेवा से हटाए गए एंबुलेंस कर्मचारियों ने भाजपा के प्रदेश मुख्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली। अर्थी पर डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक की तस्वीर लगाई गई थी, जिस पर ‘इस्तीफा दो’ लिखा था।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कोरोना काल में उन्होंने दिन-रात अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों को अस्पताल पहुंचाया। इस दौरान उनके कई साथियों की मौत भी हुई लेकिन महामारी खत्म होने के बाद उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया। उनका आरोप है कि 2021 में नौकरी गंवाने के बाद से वे लगातार बहाली और न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारी अपनी पीड़ा बताते हुए भावुक हो गए। अजय नाम के एक प्रदर्शनकारी की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि नौकरी जाने के बाद से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री के आवास के करीब 100 चक्कर लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हुई।दावा है कि कोरोना काल में उनके करीब 100 साथियों की जान चली गई फिर भी कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
कंपनी पर वसूली और शोषण के आरोप
प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली निजी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि प्रदेश में करीब 20 हजार एंबुलेंस कर्मचारी कंपनी के तहत काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर वेतन से पैसे काटे जाते हैं। विरोध करने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया जाता है। कुछ एंबुलेंस चालकों पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने का भी आरोप लगाया गया।

शरद नाम के कर्मचारी ने आरोप लगाया कि कंपनी भर्ती के नाम पर ड्राइवर से 25 हजार और टेक्नीशियन से 50 हजार रुपये तक वसूलती है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक 2021 में विरोध करने वाले करीब 3 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हटाया गया था और अब तक करीब 9 हजार लोग सेवा से बाहर किए जा चुके हैं।
प्रदर्शन के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कर्मचारियों को हिरासत में लिया और उन्हें ईको गार्डन भेज दिया। नौकरी बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर पांच साल से बेरोजगारी झेल रहे कर्मचारियों को न्याय दिलाने की मांग की।






