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बाघ से सारस और तितलियों तक… बदल रही UP की पर्यटन तस्वीर, जंगल-वेटलैंड अब बन रहे नए आकर्षण

राष्ट्रीय वन्यजीव दिवस पर जानिए कैसे दुधवा से बुंदेलखंड और गाजीपुर से मैनपुरी तक 70 इको-टूरिज्म परियोजनाएं प्रदेश में प्रकृति, पर्यटन और स्थानीय रोजगार की लिख रही हैं नई कहानी

लखनऊ, 3 सितंबर 2026:

कहीं कैमरे के लेंस में कैद होता बाघ, कहीं वेटलैंड में विचरण करता सारस और कहीं रंग-बिरंगी तितलियों के बीच प्रकृति को करीब से समझता बच्चा… यूपी में पर्यटन की तस्वीर बदल रही है। मंदिरों, ऐतिहासिक इमारतों और धार्मिक स्थलों से आगे बढ़कर प्रदेश के जंगल, नदियां, झीलें, वेटलैंड और जैव विविधता पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं। राष्ट्रीय वन्यजीव दिवस (4 सितंबर) के मौके पर प्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की कोशिशें इसी बदलाव की तस्वीर पेश कर रही हैं।
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सरकार का जोर अब सिर्फ वन्यजीव दिखाने पर ही नहीं अपितु पर्यटकों को उनके प्राकृतिक आवास और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र से परिचित कराने पर है। इसके लिए नेचर ट्रेल, इंटरप्रिटेशन सेंटर, वॉचटावर, व्यूइंग स्पेस, साइनेज और प्रजाति आधारित सर्किट विकसित किए जा रहे हैं। मकसद है कि वन्यजीव पर्यटन के साथ प्रकृति संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी मजबूत हो।

70 इको-टूरिज्म परियोजनाओं पर 231 करोड़ से अधिक धनराशि मंजूर

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच प्रदेश में 70 इको-टूरिज्म परियोजनाओं के लिए 231 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि मंजूर की है। इनमें जंगल, वेटलैंड, वन्यजीव क्षेत्र, पक्षी विहार, झील और अन्य प्राकृतिक स्थल शामिल हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक इको-टूरिज्म का उद्देश्य हर प्राकृतिक क्षेत्र की विशिष्टता को बरकरार रखते हुए पर्यटकों को उसे करीब से समझने का अवसर देना है। उनके अनुसार वन्यजीव पर्यटन केवल जानवरों को देखने या तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इससे प्रकृति के प्रति आकर्षण बढ़ने के साथ जिम्मेदार पर्यटन और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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दुधवा से रानीपुर तक जंगल सफारी का दायरा बढ़ा

तराई क्षेत्र में दुधवा को केंद्र में रखकर करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से साइनेज व्यवस्था विकसित की जा रही है। करीब 5 करोड़ रुपये दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ से दुधवा आने वाले मार्गों पर साइनेज के लिए खर्च होंगे, जबकि 3 करोड़ रुपये से अधिक दुधवा टाइगर रिजर्व, किशनपुर और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य क्षेत्रों में व्यवस्था पर खर्च किए जाएंगे। चित्रकूट के रानीपुर टाइगर रिजर्व के पास पर्यटन भूमि के विकास के लिए करीब 14 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम हो रहा है। इससे बुंदेलखंड भी प्रदेश के वन्यजीव पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।

वेटलैंड में दिखेगा प्रवासी पक्षियों का संसार

आगरा के सूर सरोवर पक्षी विहार में नेचर ट्रेल, वॉचटावर और साइनेज विकसित किए जा रहे हैं। मुजफ्फरनगर की हैदरपुर वेटलैंड में नेचर ट्रेल, नेचर कैंप और वॉचटावर तैयार किए जा रहे हैं। रायबरेली के समसपुर पक्षी विहार, महराजगंज के सोहगीबरवा वन्यजीव अभ्यारण्य और संत कबीर नगर की बखिरा झील को भी पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
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कौशांबी की अलवारा झील और दरियाबगंज झील भी नए प्रकृति पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं। अलवारा के लिए 4 करोड़ रुपये से अधिक और दरियाबगंज के लिए 3.5 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं प्रस्तावित एवं स्वीकृत हैं। सर्दियों में ग्रेलैग गूज, नॉर्दर्न पिंटेल, रडी शेलडक और नॉर्दर्न शोवलर जैसे प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी इन स्थलों को बर्ड वॉचिंग का आकर्षण बनाती है।

सारस को देखने के साथ समझेंगे उसका पूरा संसार

इटावा और मैनपुरी में 7 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से दो सारस सर्किट विकसित किए जा रहे हैं। इटावा सर्किट में सरसई नावर और परौली रामायण, जबकि मैनपुरी सर्किट में किरिथुआ, सहस सहान, कुरी जरावन, सौंज और समान शामिल हैं। यहां पाथवे, सूचना पट्टिकाओं और व्यूइंग सुविधाओं का विकास हो रहा है। इन सर्किटों की खासियत यह होगी कि पर्यटक सारस को देखने के साथ उन वेटलैंड और कृषि क्षेत्रों को भी समझ सकेंगे, जो उसके प्राकृतिक आवास और जीवन का आधार हैं।
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गाजीपुर में बच्चों के करीब आएंगी तितलियां

गाजीपुर का कामाख्या वन पार्क जैव विविधता को बच्चों और परिवारों के करीब लाने की तैयारी में है। नवंबर तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यहां तितली उद्यान और इंटरप्रिटेशन सेंटर समेत कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यानी बड़े अभ्यारण्य की यात्रा किए बिना भी बच्चे और विद्यार्थी तितलियों तथा जैव विविधता को करीब से जान सकेंगे।

यूपी का इको-टूरिज्म अब सिर्फ जंगल सफारी नहीं अपितु प्रकृति को समझने का अनुभव बन रहा है। दुधवा और रानीपुर के बाघ, वेटलैंड के प्रवासी पक्षी, सारस के प्राकृतिक आवास और गाजीपुर की तितलियां मिलकर प्रदेश में पर्यटन की एक ऐसी नई तस्वीर बना रही हैं, जिसमें रोमांच के साथ संरक्षण और स्थानीय भागीदारी भी शामिल है। राष्ट्रीय वन्यजीव दिवस वन्यजीवों को देखने के साथ उनके घर, उनकी दुनिया और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझने का संदेश देता है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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