
प्रयागराज, 15 सितंबर 2026:
UP Board Exam Pattern 2026: यूपी के माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षा का पैटर्न बदलने जा रहा है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विद्यार्थियों की सिर्फ याद करने की क्षमता के बजाय उनकी समझ, किसी ज्ञान को इस्तेमाल करने की क्षमता, विश्लेषण, मूल्यांकन, सृजनात्मकता व कौशल को परखने की तैयारी की है। यह बदलाव केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के परख मूल्यांकन केंद्र की गाइडलाइंस के आधार पर किया जा रहा है।
11वीं-12वीं के चार विषयों से शुरुआत
नए पैटर्न को समझने के लिए कक्षा 11वीं-12वीं के इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान व अर्थशास्त्र के मॉडल प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं। इन प्रश्नपत्रों के जरिए आने वाली बोर्ड परीक्षा में सवालों का बदला हुआ स्वरूप सामने आएगा। इसमें छात्रों को केवल किताब में पढ़ी जानकारी याद करके लिखने के बजाय उसे समझकर इस्तेमाल करने की जरूरत होगी।
35 फीसदी सवाल होंगे एप्लीकेशन आधारित
नए मूल्यांकन पैटर्न में ज्ञान व बोध से जुड़े 17.5 फीसदी सवाल रखे गए हैं। सबसे ज्यादा 35 फीसदी सवाल विद्यार्थियों की व्यावहारिक अनुप्रयोग क्षमता पर आधारित होंगे। यानी किसी विषय में पढ़ी गई जानकारी को परिस्थिति के हिसाब से इस्तेमाल करने की क्षमता देखी जाएगी। इसके बाद 22 फीसदी सवाल विश्लेषण क्षमता पर होंगे। मूल्यांकन व सृजनात्मक क्षमता को परखने के लिए चार-चार फीसदी सवाल रखे गए हैं। इस तरह प्रश्नपत्र का फोकस सिर्फ याद की गई जानकारी पर नहीं रहेगा।

पुरानी व्यवस्था में रटने पर ज्यादा जोर
पहले परीक्षा में ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग व कौशल को आधार बनाकर अंक दिए जाते थे। इसमें ज्ञान के लिए 20 फीसदी, बोध के लिए 30 फीसदी, अनुप्रयोग के लिए 30 फीसदी अंक तय थे, जबकि कौशल आधारित सवालों का हिस्सा 20 फीसदी तक था। अब नए पैटर्न में सवालों का स्वरूप इस तरह बदला जा रहा है कि छात्र किसी विषय को कितना समझता है, उसे किसी स्थिति में कैसे लागू करता है, किसी समस्या का विश्लेषण कैसे करता है, इसका भी आकलन हो सके।
NEP 2020 के हिसाब से बदली जा रही परीक्षा
यह बदलाव National Education Policy 2020 के तहत योग्यता आधारित सीखने को बढ़ावा देने की दिशा में किया जा रहा है। इसका फोकस रटकर याद करने के बजाय Critical Thinking, गहरी समझ, समस्या के विश्लेषण व Creative Thinking जैसी क्षमताओं को विकसित करने पर है। नई व्यवस्था में छात्रों की पढ़ाई को केवल परीक्षा में नंबर हासिल करने तक सीमित रखने के बजाय उनकी वास्तविक क्षमता को परखने की कोशिश की जा रही है। इससे बोर्ड परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों को समझकर हल करने की तैयारी छात्रों को करनी होगी।






