Prayagraj

घायल महिला वकील ने तोड़ा दम… फिर भड़का विवाद, SRN हॉस्पिटल में डॉक्टरों की हड़ताल

सड़क हादसे में घायल महिला वकील को लाया गया था एसआरएन हॉस्पिटल, इलाज में लापरवाही के आरोपों को लेकर डॉक्टरों व वकीलों में हुआ था विवाद, वकीलों ने दर्ज कराया था केस, वकील की लखनऊ में मौत के बाद एक डॉक्टर को हिरासत में लेने पर भड़के साथी

प्रयागराज, 8 जून 2026:

स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में सोमवार को एक बार फिर तनाव पसर गया। जूनियर डॉक्टरों ने कामकाज ठप कर हड़ताल शुरू कर दी, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गईं। डॉक्टरों का आरोप है कि जूनियर रेजिडेंट मोहनीश सिद्दीकी को कुछ लोग अपने साथ ले गए, जो पुलिस की वर्दी में नहीं थे। घटना की जानकारी मिलते ही डॉक्टरों में नाराजगी फैल गई और नई बिल्डिंग की ओपीडी बंद कर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया गया। इस पूरे विवाद के तार कुछ दिन पूर्व महिला वकील के साथ हुए हादसे से जुड़े हैं।

सोमवार को हॉस्पिटल में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मरीजों की भीड़ परेशान नजर आई। इलाज के लिए पहुंचे लोगों को डॉक्टर नहीं मिले, जबकि गंभीर हालत में लाए गए मरीजों के परिजनों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित हैं। जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गईं हैं।

SRN Hospital Strike Tension Escalates in Prayagraj (1)

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बता दें कि 20 मई को सड़क हादसे में घायल हुईं झूंसी निवासी महिला अधिवक्ता जागृति शुक्ला की इलाज के दौरान देर रात लखनऊ के पीजीआई में मौत हो गई। वह हादसे के दिन हाईकोर्ट जा रही थीं, तभी पोलोग्राउंड के पास सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। हादसे के बाद जागृति शुक्ला को सबसे पहले एसआरएन अस्पताल लाया गया था। उस समय कथित तौर पर इलाज में देरी को लेकर परिजनों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद हो गया था।

मामला इतना बढ़ा कि जूनियर डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार कर ओपीडी सेवाएं बंद कर दी थीं। घटना के बाद डॉक्टरों के खिलाफ मारपीट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवाद के बाद प्रशासन ने 20 जूनियर डॉक्टरों को निलंबित कर दिया था। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य को भी पद से हटा दिया गया था।

अब देर रात जागृति शुक्ला की मौत की खबर मिलने के बाद वकीलों में शोक फैल गया। उनके साथी अधिवक्ताओं और समर्थकों ने सोशल मीडिया पर एसआरएन अस्पताल के उपचार पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि समय रहते समुचित इलाज मिला होता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। इस मामले को लेकर पुलिस भी अलर्ट हो गई है।

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